उत्तराखंड की राजधानी देहरादून पूरे देश भर में अच्छी आबोहवा और साफ ठंडा वातावरण के लिए जाना जाता है। हर साल गर्मियों के मौसम में इस शहर की डिमांड बढ़ जाती है। हाल के वर्षों में तेजी से परिवर्तित हुई जलवायु की वजह से इस शहर में भी बदलाव आना शुरू हो गए हैं। इस बार उत्तराखंड की राजधानी देहरादून गर्मी की तपिश में झुलस गया। कुछ वर्षों पहले तक शहर में जब पारा 35 से ऊपर पहुंचता था तब बारिश हो जाती थी। लेकिन इस बार देहरादून में तापमान 41 पार कर गया। दून का तापमान 12 साल बाद सबसे अधिक रिकॉर्ड किया गया। वर्ष 2012 में मई महीने का अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस रहा था। देहरादून में तापमान 41 होने के बावजूद बारिश नहीं हुई। हां, आसमान में बादल जरूर चाहे लेकिन वह बरस नहीं सके। तन झुलसाने वाली गर्मी ने जीना मुहाल कर दिया है। दोपहर में लू के थपेड़ों के चलते गली मोहल्लों में सन्नाटा पसर रहा है। करीब एक दशक पहले उत्तराखंड की राजधानी देहरादून अपने अच्छे क्लाइमेट के लिए खूब इतराता था। यहां की आबोहवा और साफ ठंडा वातावरण ने पूरे देश भर में देहरादून को नई पहचान भी दी। शहर अपने शांत और आरामदेह जीवन के लिए जाना जाता है जहां मौसम सुहावना और हवा ताजा है। यह गंगा और यमुना नदियों के बीच स्थित है, जो देश के दो सबसे प्रमुख जल निकाय हैं। दून में शानदार मौसम की वजह से अन्य राज्यों के लोग यहां पर बसने लगे। हर साल गर्मियों के मौसम में इस शहर की डिमांड लगातार बढ़ती चली गई। जिसकी वजह से देहरादून शहर और आसपास क्षेत्रों की जमीन के भाव भी आसमान छू गए। हाल के वर्षों में तेजी से परिवर्तित हुई जलवायु की वजह से इस शहर में भी बदलाव आना शुरू हो गए हैं। लेकिन इस बार उत्तराखंड की राजधानी देहरादून गर्मी की तपिश में झुलस गया। कुछ वर्षों पहले तक शहर में जब पारा 35 से ऊपर पहुंचता था तब बारिश हो जाती थी। लेकिन इस बार देहरादून में तापमान 41 पार कर गया। दून का तापमान 12 साल बाद सबसे अधिक रिकॉर्ड किया गया। वर्ष 2012 में मई महीने का अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस रहा था। देहरादून में तापमान 41 होने के बावजूद बारिश नहीं हुई। हां, आसमान में बदला जरूर चाहे लेकिन वह बरस नहीं सके। दोपहर के समय देहरादून की सड़कों पर भीषण गर्मी के कारण राहगीर छाया में रुककर गर्मी से बचते देखे गए। चिलचिलाती गर्मी में तेज धूप से त्वचा को भी नुकसान पहुंचने लगा है। धूप के कारण त्वचा का रंग काला पड़ रहा है और साथ ही लाल रंग के रैशेज, दाने और खुजली होने की समस्या भी लोगों में हो रही है। देहरादून के अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश, उधम सिंह नगर, रुड़की और हल्द्वानी आदि मैदानी शहरों में हीटवेव जैसे हालात बने हुए हैं। धार्मिक नगरी हरिद्वार में भी गर्मी से बुरा हाल है। यहां पर अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश: 41.5 और 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मई मध्य से पारा लगातार चढ़ रहा है। तन झुलसाने वाली गर्मी ने जीना मुहाल कर दिया है। दोपहर में लू के थपेड़ों के चलते गली मोहल्लों में सन्नाटा पसर रहा है। बाजारों में भी शाम के वक्त ही चहल पहल दिख रही है। इधर गर्मी से निजात पाने को लोग गंगा घाटों का रुख कर रहे हैं। ऐसे ही ऋषिकेश में गर्मी से बुरा हाल है। यहां भी अधिकतम 41 डिग्री पहुंच चुका है। प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में उमस भरी गर्मी बेहाल कर रही है। वहीं पहाड़ों में जरूर कुछ गर्मी से राहत है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 28-29 मई को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने अनुसार आने वाले सप्ताह में मैदानी क्षेत्रों में कहीं-कहीं लू चलने की संभावना है।



