पिछले महीने आईएमडी ने बताया था कि देश में इस साल सामान्य से बेहतर मानसून रहेगा। मौसम विभाग 104 से 110 फीसदी के बीच बारिश को सामान्य से बेहतर मानता है। यह फसलों के लिए अच्छा संकेत है। खरीफ की फसलें सामान्य मानसूनी बारिश पर निर्भर करती हैं। देश की लगभग 50 फीसदी कृषि भूमि के पास सिंचाई का कोई अन्य साधन नहीं है। मानसून की बारिश देश के जलाशयों और जलभृतों को रिचार्ज करने के लिए भी महत्वपूर्ण है, जहां से पानी का उपयोग साल के अंत में फसलों की सिंचाई के लिए किया जा सकता है। भारत खाद्यान्न के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में उभरा है, लेकिन पिछले साल अनियमित मानसून के चलते कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ। इससे आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए चीनी, चावल, गेहूं और प्याज के विदेशी शिपमेंट पर अंकुश लगाना पड़ा। कृषि क्षेत्र में मजबूत वृद्धि मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने में मदद करती है। आईएमडी ने बताया कि 2024 में 106% यानी 87 सेंटीमीटर बारिश हो सकती है। देश के कुछ हिस्सों में अप्रैल-मई में भीषण गर्मी का सामना किया, जिसमें अधिकतम तापमान ने कई राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ दिए और स्वास्थ्य और आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित किया। भीषण गर्मी पावर ग्रिड पर दबाव डाल रही है और जल निकायों को सुखा रही है, जिससे देश के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। इसलिए, सामान्य से अधिक मानसूनी बारिश की भविष्यवाणी देश के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आई है। भारत के कृषि क्षेत्र का 52 फीसदी मानसून पर निर्भर है। यह देशभर में बिजली में बिजली के उत्पादन के अलावा पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण जलायशों को फिर से भरने के लिए महत्वपूर्ण है।आईएमडी पिछले 19 सालों से मानसून का पूर्वानुमान कर रहा है। आईएमडी के अनुसार 2005 से 2023 तक 2015 को छोड़कर पूर्वानुमान सही रहा है।



