
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से संस्कृति विभाग प्रेक्षागृह, देहरादून में कनिष्ठ अभियन्ता सेवा परीक्षा, 2023 के अन्तर्गत विभिन्न विभागों में चयनित 1094 कनिष्ठ अभियंताओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कनिष्ठ अभियन्ता पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों से वर्चुअल संवाद किया। उन्होंने चयनित सभी कनिष्ठ अभियन्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि आज आपके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। अपने माता-पिता गुरुओं और ईश्वर की कृपा से सभी को देवभूमि उत्तराखण्ड में सेवा करने का अवसर मिल रहा है।मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि आज जिन 1094 अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिली है, इनसे विभागों को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि ज्ञान, विज्ञान और तकनीक का जिस तेजी से विस्तार हो रहा है, उस हिसाब से नियमित अपडेट रहें। सभी पूर्ण निष्ठा और समर्पण भाव से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें, इसके लिए कार्यक्षेत्र में नियमित दिनचर्या बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले तीन सालों में सरकारी विभागों में लगभग 17 हजार से अधिक नौकरियां प्रदान की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 04 जुलाई 2021 को शपथ लेने के बाद पहली कैबिनेट में हमने निर्णय लिया कि राज्य के सभी रिक्त पदों पर भर्ती की जायेगी। अभी अनेक भर्ती परीक्षाएं गतिमान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में भर्ती परीक्षाओं के अधियाचन से नियुक्ति पत्र प्रदान करने तक की पूरी समयावधि को कम किया गया है। पूरे साल के लिए भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर बनाया गया है। राज्य में नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद से सभी भर्ती परीक्षाएं पारदर्शिता के साथ सम्पन्न हुई हैं। आज योग्य युवा हर भर्ती परीक्षा में सफल हो रहे हैं। राज्य में नकल को जड़ से समाप्त करने के लिए नकल माफियाओं पर सरकार द्वारा सख्त कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में नई कार्य संस्कृति की शुरुआत हुई है। उत्तराखण्ड में भी राज्य सरकार द्वारा नई कार्य संस्कृति लाने की दिशा में लगातार कार्य किये जा रहे हैं। नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्यों के इंडिकेटर में राज्य को देश में प्रथम स्थान मिला है। उत्तराखण्ड देश में सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों की श्रेणी में दूसरे स्थान पर है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, प्रेमचन्द अग्रवाल, राज्य सभा सांसद नरेश बंसल, विधायक श्रीमती सविता कपूर, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव डॉ. रंजीत सिन्हा, एस.एन.पाण्डेय, डॉ. आर.राजेश कुमार, अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान, श्रीमती रंजना राजगुरू, अतर सिंह, विनीत कुमार, निदेशक शहरी विकास नितीन भदौरिया एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
देवभूमि में उपद्रव फैलाने और सरकारी-निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर कड़ी कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त कानून बनाने की घोषणा की थी। पहले इसे मार्च 2024 को अध्यादेश के रूप में लागू किया गया था। फिर अगस्त में गैरसैंण में मॉनसून सत्र में इसे विधिवत विधेयक के रूप में पारित कराया गया।राज्यपाल ने राजभवन ने विधानसभा से पारित उत्तराखंड लोक एवं निजी संपत्ति क्षति वसूली विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी है। अब यह अधिनियम का स्वरूप ले लेगा। इस विधेयक में यह व्यवस्था की गई है राज्य में हड़ताल बंद, दंगा एवं विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक अथवा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से संपत्ति के नुकसान की क्षतिपूर्ति ली जाएगी। संपत्ति के मूल्य की गणना बाजार भाव के हिसाब से की जाएगी। )
उत्तराखंड में अब अगर किसी ने दंगा, फसाद और सरकारी संपत्तियों में तोड़फोड़ पहुंचाई तो उसे महंगा पड़ेगा। अक्सर देखा जाता है कि हड़ताल, विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाते हैं। देवभूमि में अब यह सब करना उपद्रवियों को भारी पड़ेगा। राज्यपाल ने राजभवन ने विधानसभा से पारित उत्तराखंड लोक एवं निजी संपत्ति क्षति वसूली विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी है। अब यह अधिनियम का स्वरूप ले लेगा। बता दें कि प्रदेश सरकार ने ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में उत्तराखंड लोक एवं निजी संपत्ति क्षति वसूली विधेयक पारित किया था। इस विधेयक में यह व्यवस्था की गई है राज्य में हड़ताल बंद, दंगा एवं विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक अथवा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से संपत्ति के नुकसान की क्षतिपूर्ति ली जाएगी। संपत्ति के मूल्य की गणना बाजार भाव के हिसाब से की जाएगी। मालूम हो कि प्रदेश में उपद्रव फैलाने और सरकारी-निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर कड़ी कार्रवाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त कानून बनाने की घोषणा की थी। पहले इसे मार्च 2024 को अध्यादेश के रूप में लागू किया गया था। फिर अगस्त में गैरसैंण में मॉनसून सत्र में इसे विधिवत विधेयक के रूप में पारित कराया गया। इसमें सजा का प्रावधान भी किया गया है। एक रिटायर्ड जिला जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा। इस ट्रिब्यूनल को सिविल कोर्ट के समान शक्तियां होंगी। संपत्ति का नुकसान होने की दशा में तीन महीने के भीतर ट्रिब्यूनल में अपील करनी होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, ‘उत्तराखंड लोक (सरकारी) तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली (अध्यादेश) कानून 2024 को मंजूरी प्रदान करने पर राज्यपाल का हार्दिक आभार। इस कानून के तहत, दंगाइयों से सरकारी और निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई की जा सकेगी।



