केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सिलक्यारा पहुंचे हैं। उन्होंने सुरंग में चल रहे राहत एवं बचाव कार्य का स्थलीय निरीक्षण और समीक्षा की। मुख्य सचिव एस एस संधू भी उनके साथ मौजूद रहे। गडकरी व मुख्यमंत्री धामी ने यहां अधिकारियों के साथ बैठक की। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग में फंसे लोगों को बचाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार की एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। हिमालय में मिट्टी की प्रोफाइल एक जैसी नहीं है। केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह ने उत्तरकाशी के सिलक्यारा में साइट पर पहुंचकर निरीक्षण किया और रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने हादसे की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि काम चल रहा है। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं। सभी एक्सपर्ट से बातचीत करके हमारा पूरा प्रयास है कि मजदूरों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जाए। उनसे मेरी बात हुई है। हम सब तरह के विकल्प देख रहे हैं। उत्तरकाशी की सुंरग में फंसे मजूदरों को लेकर जारी रेस्क्यू ऑपरेशन पर लगातार अपनी नजर बनाए और स्थिति का जायजा ले रहे पीएमओ के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे पल-पल की अपडेट दे रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने बताया कि मलबे के रास्ते ड्रिलिंग करने वाली ऑगर मशीन में फिर से कुछ समस्याएं आ रही हैं। उन्होंने कहा, सुरंग में फंसे हुए मजदूर सुरक्षित और स्वस्थ हैं, ऐसे में जल्दबाजी नहीं करना बहुत आवश्यक है। अगर हम इस तरह की स्थिति में जल्दबाजी करते हैं तो ऐसी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। एनडीआरएफ के महानिदेशक ने बताया कि सुरंग में फंसे श्रमिक ठीक है। उन्होंने कहा, सुरंग में काम करने वाले लोग मानसिक रूप से दृढ़ होते हैं और इन लोगों को यह भी पता है कि उन्हें बाहर निकालने के लिए जबरदस्त प्रयास किए जा रहे हैं तो वे आशान्वित हैं।
टनल में फंसे 41 में सबसे अधिक झारखंड के मजदूर हैं–
सिलक्यारा टनल में 8 राज्यों के 41 मजदूर फंसे हैं। इसमें उत्तराखंड के 2, हिमाचल प्रदेश का 1, यूपी के 8, बिहार के 5, पश्चिम बंगाल के 3, असम के 2, झारखंड के 15 और ओडिशा के 5 मजदूर फंसे हैं। सुरंग में फंसे सबसे अधिक मजदूर झारखंड के हैं। 14 दिन से जो मजदूर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं उनके नाम इस प्रकार हैं। गब्बर सिह नेगी, उत्तराखंड, सबाह अहमद, बिहार, सोनू शाह, बिहार, मनिर तालुकदार, पश्चिम बंगाल, सेविक पखेरा, पश्चिम बंगाल, अखिलेष कुमार, यूपी, जयदेव परमानिक, पश्चिम बंगाल, वीरेन्द्र किसकू, बिहार, सपन मंडल, ओडिशा, सुशील कुमार, बिहार, विश्वजीत कुमार, झारखंड, सुबोध कुमार, झारखंड, भगवान बत्रा, ओडिशा, अंकित, यूपी, राम मिलन, यूपी, सत्यदेव, यूपी, सन्तोष, यूपी, जय प्रकाश, यूपी, राम सुन्दर, उत्तराखंड, मंजीत, यूपी, अनिल बेदिया, झारखंड,श्राजेद्र बेदिया, झारखंड, सुकराम, झारखंड, टिकू सरदार, झारखंड, गुनोधर, झारखंड, रनजीत, झारखंड, रविन्द्र, झारखंड, समीर, झारखंड, विशेषर नायक, ओडिशा, राजू नायक, ओडिशा, महादेव, झारखंड, मुदतू मुर्म, झारखडं, धीरेन, ओडिशा, चमरा उरॉव, झारखंड, विजय होरो, झारखंड, गणपति, झारखंड, संजय, असम, राम प्रसाद, असम, विशाल, हिमाचल प्रदेश, पु्ष्कर, उत्तराखंड दीपक कुमार, बिहार से हैं। बता दें कि 12 नवंबर दीपावली के दिन उत्तरकाशी की निर्माणाधीन सिलक्यारा टनल धंसने से 41 मजदूर फंस गए थे। तभी से इन सभी को बचाने के लिए दिन-रात रेस्क्यू अभियान चल रहा है। लेकिन अभी तक 41 जिंदगियों की सांसें अटकी हुई हैं। लेकिन अभी पूरी तरह से उम्मीदें जिंदा हैं और इन सभी 41 मजदूरों का जल्द ही नया सवेरा होगा।



