रुड़की-गंगा-जमुनी अदबी मंच व नोजवान भारत सभा के संयुक्त तत्वावधान में गज़लों के सरताज दुष्यंत की याद में एक साहित्यिक कार्यक्रम रुड़की की सैनी धर्मशाला में आयोजित किया गया।प्रसिद्ध कवि विज्ञान वृत की अध्यक्षता व शायर ओम प्रकाश नूर के संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में राय बरेली के गजलकार जय चक्रवर्ती को इस वर्ष के दुष्यंत सम्मान से नवाजा गया।मुख्य अतिथि के रूप में लखनऊ से आए शायर ओम प्रकाश नदीम ने कहा,”कल मज़हब के मेले में दुकानें लगती थी,अब मज़हब की दुकानों पर मेला लगता है।”उन्होंने सम्मानित हुए गजलकार जय चक्रवर्ती को दुष्यंत की राह का शायर बताया।रुड़की के शायर कृष्ण सुकुमार ने मंच से पढ़ते हुए कहा,”तमाम जिंदगी बेकार तामझाम किया,जरा सी राख बची जब सफ़र तमाम किया।”विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के उपकुलपति डॉ श्रीगोपाल नारसन ने राजनीति पर करारा व्यंग्य करते हुए कहा,”मैंने इस देश मे गद्दारों को फलते फूलते देखा,नेताओं की अगल बगल में उनको चलते देखा,सच कहने वाला आंखों में खलते देखा,एक नम्बर के बदमाश को टिकट मिलते देखा।”
सम्मानित हुए शायर जय चक्रवर्ती बोले,”खिलौने बेचकर रघु की विधवा घर चलाती है,हुकूमत रोटियों पे उसकी बुलडोजर चलाती है,न जाने कौन सी खिड़की से घुस आती है महंगाई ,हमारे दुधमुहो के पेट पर खंजर चलाती है।”
मनोज पांडेय होश ने कहा,”सियासत को दिखला सके आईना जो,जमाने मे ऐसा निडर ढूंढते है।”संचालक शायर ओम प्रकाश नूर ने कहा ,”वो खिलौना समझते है इंसान को,जिनकी जेबो में डॉलर है दीनार है।”वही अनिल अमरोही के शब्दों में,”सबको करवाता है वो रक्स ए हयात,रब ही सबसे बड़ा मदारी है।”कार्यक्रम में शबा राव,बेताब अंसारी, शाहिदा शेख आदि ने भी अपने कलाम से नवाजा।अतिथियों का स्वागत आभार संस्था महासचिव दिनेश धीमान द्वारा किया गया।





