उत्तराखंड मेँ भी १९८४ मेँ सरकार की गलत शराब नीति के खिलाफ उत्तराखंड जन संघर्षवाहिनी के नेतृत्व मेँ नशा नही रोजगार दो आन्दोलन चला, पूरे उत्तराखंड मेँ इस आंदोलन ने शराब माफिया की चूलें हिला दी थी और गांव गांव मेँ महिलाओं, और बच्चों ने भी बढ़ चढ़ कर भाग लेकर शराबियों को बिच्छू घास लगाकर शराब न पीने की सौगंध दिलाइ और नशे का कारोबार करने वालों का मुँह कालाकर नशा न बेचने को मजबूर किया। कई सालों तक इस आंदोलन का प्रभाव रहा और लोग शराब पीने से डरने लग गए थे। आज उत्तराखंड को विशेषकर इस नशे के खिलाफ खड़े होने की नितांत आवश्यकता है। नशा नहीं अच्छी शिक्षा दो, चौबीसों घंटे बिजली दो, नशा नही अच्छी स्वाश्य सुविधा दो, ठेके नहीं अच्छी सड़क दो आदि जैसे जन जागरण की आवश्यकता है। खैर १९८४ और १९९४ के महा आंदोलनों ने उत्तराखंड को जागृति किया लेकिन जन आंदोलन करने वालों को हासिये मेँ धकेलने के कारण अब शायद ही कोई बढ़ा आंदोलन हो पायेगा। भले ही जानानंदोलनकारी अपने स्तर पर समाज को जागरूक कर रहे है और लोक नियंताओं की गलत नीतियो से समाज का ग्वाला भी कर रहे हैं।
नशा करने वाले कई भयंकर दुर्घटना के शिकार हुवे हैं, कई को सांप ने डस दिया तो कई पहाड़ से गिरकर या नदी मेँ डूबकर काल का ग्रास बने। अभी हाल ही मेँ रानीखेत के पास राजन नाम के ब्यक्ति की मौत तेंदुवे के आक्रमण से हुई। राजन भी बी ए करने के बाद महानगर मेँ नौकरी करने गया, छोटी मोटी नौकरी कर गुजारा तो करने लगा लेकिन दिल्ली में वह नशेड़ियों की संगत में पड़ गया। जो भी वह कमाता था नशे में फूंक देता था। थकहार कर माँ के पास गांव इस आशा मेँ लौटा कि बूढ़ी माँ को कुछ सहारा दे सके और नशे से बच सके। लेकिन नशे का आदी हो चुका राजन नशा नहीं छोड़ पाया और नशे की खोज में रोज मार्किट जाता और अपने नशे का इंतजाम कर ही लेता था। नशे की हालत में वह अकेले पहाड़ का रास्ता तय करता और देर रात घर लौटकर बूढ़ी माँ से खाना मांगता था। ममतामयी माँ खाना परोसकर उसे समझती थी। तेंदुवे के खतरे से उसे सावधान रहने को कहती। लेकिन राजन की विवेक शीलता तो मानों ख़त्म हो गयी थी। एक दिन रात भर वह घर नहीं लौटा तो माँ ने आसपड़ोस के लोगों से राजन का पता लगाने को कहा। दूसरे दिन जंगल में रस्ते से दूर झाड़ियों में उसकी आधी खायी लाश मिली। बूढ़ी माँ अपने राजन की इस दर्दभरी मौत पर मातम मचाती रही, शायद यही उसकी नियति रही होगी।
यदि किसी बच्चे में नशे की प्रबृति हो भी जाती है तो हमें उसका तिरस्कार नहीं करना चाहिए बल्कि उसके प्रति अपनापन और प्यार दर्शना चाहिए। उसको सामाजिक कार्यों में इंगेज करना चाहिए ताकि वह अपना अनादर और अपने को आइसोलेशन में न समझे। ऎसी ही एक कहानी है संतोष की, जो कि ऊटी के एक बोर्डिंग स्कूल में पढता था। शौक शौक में इ सिगरेट (वैपिंग) का आदी हो गया था, स्कूल वाले भी उसकी हरकतों से परेशान हो गए थे और उसको स्कूल से घर भेज दिया गया। उसके माँ बाप ने उसके साथ एक दोस्त की तरह का ब्यवहार किया और उसके नशे की आदत और नशे के प्रकार के बारे में जानाकरी हाशिल की। उन्होंने स्वयं उसका भरपूर मार्गदर्शन किया, उसको अच्छे दोस्त और ख़राब दोस्तों के बीच के अंतर को समझाया। संतोष को पीयर प्रेशर से भी बहार आने के लिए यह सलाह दी कि किसी से वह अपनी तुलना न करे। संतोष बहुत खुश था कि उसके माँ बाप ने उसको समझा। वापिस अपने हॉस्टल लौटकर उसने अपने अध्यापकों और सहपाठियों के दिल जीता। उसने खेलकूद में खूब भाग लिया और मन लगाकर पढ़ाई की। कक्षा बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में वह ९५ प्रतिशत अंक लाया।
हमारी सरकारों में कभी कभी ऐसे लोग, लोक नियंता बन जाते हैं जिन्हें सामाजिक सरोकारों से कोई मतलब नहीं होता है। दिल्ली सरकार की शराब नीति का दुष्परिणाम सर्व विदित हैं। उत्तराखंड में प्रस्तावित शराब नीति तो मानो देवभूमि के घर घर को बार में तब्दील करने वाली थी। इस नीति के अनुसार किसी भी उत्तराखंड निवासी को अपने घर में 50 लीटर तक शराब रखने का अधिकार मिल गया था जिसके लिए एक लाइसेंस उत्तराखंड सरकार से लेना प्रस्तावित था। धन्य हो महिला मंच जैसे जागरूक संघटन की जिन्होंने विरोध किया तो सरकार ने बहुत ही अच्छा निर्णय लेकर इस नीति को ही स्थगित कर दिया। हमें वास्तव में शराब, नशा , जुवा और अन्य समाज विरोधी गतिविधियों से खुद को बचाते हुवे अपने परिवेश को भी बचाना है। एक अच्छा परिवेश विकसित मानसिकता को जन्मेगा।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने २०२०-२१ मेँ नशा मुक्त भारत अभियान चलाया था। मंत्रालय द्वारा यह एक सही पहल थी और यह सच है कि नशा मुक्त भारत ही सुदृढ़ भारत का निर्माण करेगा। इस पहल को प्रभावी ढंग से एक मिशन क़ी भांति चलाये जाने क़ी नितांत आवश्यकता है। नशे के खिलाफ समाज मेँ सक्रिय सभी संस्थाएं एक जुटता के साथ काम करेंगी और भारत सरकार नशे के खिलाफ कानून को सख्ती से लागू करेगी तो अवश्य हमारे सभी नौनिहालों का भविष्य सुनहरा होगा।
नशे का करो प्रतिकार, बचाओ अपना घर संसार।
नशा एक अभिशाप है, न मिटने वाला महा पाप है।।
नशे का करो प्रतिकार, मचाती है नशा, हाहाकार।
नशा एक षड़यंत्र है, समाजविरोधियों का यन्त्र है।।
नाग का फन सा तंत्र है, बनाती गुलाम व परतंत्र है ।
नशा एक अभिशाप है, यह न मिटने वाला श्राप है।।



