नेपाल में एक बार फिर विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। यह भूकंप शुक्रवार देर रात 11:32 पर 6.4 तीव्रता का भूकंप आया। इसमें 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। नेपाल में दो जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इनमें रुकुम पश्चिम में 36 और 92 लोगों ने जाजरकोट में जान गंवाई। केंद्र काठमांडू से 331 किमी उत्तर-पश्चिम में 10 किमी जमीन के नीचे था। रिपोर्ट के मुताबिक इस विनाशकारी भूकंप में 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। भूकंप से कई इमारतें टूट गई हैं और मलबे में कई लोग दबे हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं उत्तराखंड के कई जिलों में धरती डोली। शुक्रवार रात 11.34 मिनट में उधम सिंह नगर में भूकंप के झटके महसूस किए गए। देहरादून काशीपुर, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के झटकों से लोग दहशत में आ गए। लोग आधी रात घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों पर चले गए। भू वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड को पहले भी भूकंप के दृष्टिकोण से अति संवेदनशील माना है। भू वैज्ञानिकों समय-समय पर लोगों को आगाह भी करते रहे हैं। वहीं पूर्व में उत्तरकाशी, चमोली में आए भूकंप की विनाश लीला को लोग आज तक भूल नहीं पाए हैं और याद करके सिहर उठते हैं। जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। नेपाल में एक महीने में तीसरी बार तेज भूकंप आया है। राहत और बचाव कार्य जारी है। सरकार के प्रवक्ता के मुताबकि प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने प्रभावित इलाकों का शनिवार को दौरा किया। भूकंप का असर भारत में भी देखने को मिला। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और बिहार की राजधानी पटना में झटके महसूस किए गए। भारत में भूकंप से अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। बिहार में पटना समेत आरा, दरभंगा, गया, वैशाली, खगड़िया, सिवान, बेतिया, बक्सर, बगहा, नालंदा, नवादा 11 जिलों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप के दौरान धरती करीब एक मिनट तक धरती हिलती रही। कई बार आफ्टर शॉक्स भी महसूस किए गए। सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल और दरभंगा के कुछ हिस्से जोन 5 में आते हैं, जो बेहद खतरनाक हैं। राजधानी पटना सहित बिहार के बाकी हिस्से जोन 4 में आते हैं, जहां भूकंप का खतरा कम रहता है।मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, सतना और रीवा में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। प्रदेश के आगर मालवा और मुरैना जिले के कुछ हिस्सों में भी धरती में कंपन महसूस किया गया। शुरुआती जानकारी में प्रदेश में किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है। यूपी में राजधानी लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, कासगंज सहित कई जिलों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। गाजियाबाद के रहने वाले गोपाल ने बताया कि भूकंप के झटके 15 सेकंड से ज्यादा देर तक महसूस किए गए।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल को हर संभव सहायता का आश्वासन देते हुए कहा भूकंप से हुए जान-माल के नुकसान पर दुख जताया। उन्होंने कहा, नेपाल में भूकंप के कारण हुई जनहानि और क्षति से अत्यंत दुखी हूं। भारत नेपाल के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है और हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है। हमारी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं और हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। बता दें कि नेपाल में पिछले कुछ महीनों के अंदर भूकंप की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। पिछले महीने की 22 अक्टूबर को आए भूकंप का केंद्र भी नेपाल ही था। नेपाल में भूकंप के 4 झटके लगे थे। सुबह 7:39 मिनट पर भूकंप का पहला झटका लगा था। जिसकी तीव्रता रेक्टर स्केल पर 6.1 मापी गई। इसके बाद भूकंप का दूसरा झटका 4.2 तीव्रता का 8:08 मिनट आया था। भूकंप का तीसरा झटका सुबह 8:28 मिनट पर महसूस किया गया था और इसकी तीव्रता 4.3 रही थी। इसके बाद 8:59 मिनट पर चौथी बार भूकंप का झटका महसूस किया गया था। सबसे जानलेवा भूकंप चीन में 1556 में आया था, जिसमें 8.30 लाख लोगों की मौत हुई थी। तीव्रता के लिहाज से अब तक का सबसे खतरनाक भूकंप चिली में 22 मई 1960 को आया था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 9.5 थी। इसकी वजह से आई सुनामी से दक्षिणी चिली, हवाई द्वीप, जापान, फिलीपींस, पूर्वी न्यूजीलैंड, दक्षिण-पूर्व ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में भयानक तबाही मची थी। इसमें 1655 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 3000 लोग घायल हुए थे।गौरतलब है कि हमारी धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्यादा दबाव पड़ने पर ये प्लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्ता खोजती है और इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।



