प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर देश को जाति के नाम पर विभाजित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के जातिगत सर्वे या किसी विशिष्ट पार्टी का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन उन्होंने सत्ता में रहते हुए विकास सुनिश्चित करने में नाकाम रहने के लिए विपक्ष पर हमला बोला। पीएम ने कहा कि विपक्ष गरीबों की भावनाओं के साथ खेलते हैं। बिहार सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक राज्य की कुल 13 करोड़ की आबादी में पिछड़े वर्ग की संख्या 27.13 फीसदी है। इसी तरह अत्यंत पिछड़े वर्ग की कुल आबादी 36.01 फीसदी है। यानी पिछड़ा वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग की संयुक्त आबादी 63.14 फीसदी है। केवल 15.52 फीसदी लोग सामान्य वर्ग के हैं। अनुसूचित जाति के लोग 19.65 फीसदी और अनुसूचित जनजाति की कुल आबादी 1.68 फीसदी है। राज्य में 3.6 फीसदी ब्राह्मण, 3.45 फीसदी राजपूत, 2.89 फीसदी भूमिहार, 0.60 फीसदी कायस्थ, 14.26 फीसदी यादव, 2.87 फीसदी कुर्मी, 2.81 फीसदी तेली, 3.08 फीसदी मुसहर, 0.68 फीसदी सोनार हैं। बिहार की कुल आबादी में 81.99 फीसदी हिंदू हैं। केवल 17.7 फीसदी लोग मुसलमान हैं। बाकी ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन तथा अन्य धर्म को मानने वालों की संख्या केवल 1 फीसदी से भी कम है। बता दें कि इसी साल जनवरी से गणना का पहला चरण शुरू हुआ था। इस चरण में मकानों की सूचीकरण, मकानों को गिना गया। यह चरण 21 जनवरी 2023 को पूरा कर लिया गया था। जातीय गणना का दूसरा चरण 15 अप्रैल से शुरू हुआ था। जिसे 15 मई को पूरा हो जाना था। लोगों से डेटा जुटाए गए। दूसरे चरण में परिवारों की संख्या, उनके रहन-सहन, आय आदि के आंकड़े जुटाए गए। यह मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सरकार चाहे तो गणना करा सकती है। इसके तुरंत बाद नीतीश सरकार ने जातीय गणना को लेकर आदेश जारी कर दिया था।



