
(म्यांमार और थाईलैंड में शुक्रवार 28 मार्च दोपहर 11:50 बजे 7.7 तीव्रता का भूकंप आया। म्यांमार और थाईलैंड में यह 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप है। भयंकर भूकंप ने एक झटके में हजारों लोगों की जान ले ली। दोनों देशों में भारी नुकसान हुआ है। कई इमारतें, पुल ध्वस्त हो गए। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, इस भूकंप से होने वाली मौतों की आशंका को रेड कैटेगरी में रखा गया है। इस कैटेगरी में 10 हजार से 1 लाख मौतें तक हो सकती हैं, जिसकी संभावना 34% यानी सबसे ज्यादा है। भारी तबाही के चलते म्यांमार के 6 राज्यों और पूरे थाईलैंड में इमरजेंसी लगा दी गई है। अमेरिका, भारत समेत कई देश दोनों देशों की मदद करने के लिए आगे आए हैं।)
म्यांमार और थाईलैंड के लोग 28 मार्च साल 2025 का दिन कभी नहीं भुला सकेंगे । यह इतनी बड़ी घटना है कि इसमें विनाशकारी, आपदा, खौफनाक मंजर, तबाही और त्रासदी शब्द भी कम पड़ गए । भयंकर भूकंप ने एक झटके में हजारों लोगों की जान ले ली। दोनों देशों में भारी नुकसान हुआ है। जिसकी भरपाई लंबे समय तक नहीं हो पाएगी। सबसे ज्यादा म्यांमार में चारों ओर तबाही का मंजर है। भूकंप की वजह से कई ऊंची-ऊंची बिल्डिंग भर भरभरा कर गिर गई। म्यांमार और थाईलैंड में कई इमारतें, पुल ध्वस्त हो गए। म्यांमार में हजारों लोगों की मौत हुई है। लेकिन अभी पुष्टि नहीं हुई है। यह देश दुनिया से मदद मांग रहा है। म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप की खबर पूरे दुनिया भर में ट्रेंड हुई । भारत समेत कई देश दोनों देशों की मदद के लिए आगे आए हैं। म्यांमार और थाईलैंड में दहशत का माहौल है। दोनों देशों में राहत बचाव कार्य जारी है। म्यांमार की सैन्य सरकार ने 144 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि 732 लोग घायल हैं। उधर, थाईलैंड में 10 लोगों की मौत हुई है। इस तरह इस आपदा में अब तक 154 लोगों ने जान गंवाई है।थाइलैंड में सभी एक लाख भारतीय पर्यटक सुरक्षित हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रभावितों की कुशलता की कामना कर मदद की पेशकश भी की। पीएम मोदी 3 अप्रैल काे थाइलैंड में बिमस्टेक संगठन की बैठक में शामिल होंगे।वहीं म्यांमार सरकार के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में रक्तदान की अत्यधिक आवश्यकता है। सैन्य सरकार ने विदेशी सहायता स्वीकार करने की घोषणा की है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने प्रारंभिक राहत कार्यों के लिए 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता राशि जारी की है। वहीं चीन और रूस ने म्यांमार में बचाव दल भेजे हैं, राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अमेरिकी मदद की बात कही है। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, इस भूकंप से होने वाली मौतों की आशंका को रेड कैटेगरी में रखा गया है। इस कैटेगरी में 10 हजार से 1 लाख मौतें तक हो सकती हैं, जिसकी संभावना 34% यानी सबसे ज्यादा है। भारत में कोलकाता, इंफाल, मेघालय और ईस्ट कार्गो हिल में भूकंप के झटके महसूस किए गए। बांग्लादेश में ढाका, चटगांव समेत कई हिस्सों में 7.3 तीव्रता के झटके आए।

म्यांमार और थाईलैंड में 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप घोषित किया गया–
म्यांमार में शुक्रवार सुबह 11:50 बजे 7.7 तीव्रता का भूकंप आया। म्यांमार और थाईलैंड में यह 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप है। भारी तबाही के चलते म्यांमार के 6 राज्यों और पूरे थाईलैंड में इमरजेंसी लगा दी गई है। म्यांमार में 12 मिनट बाद फिर 6.4 तीव्रता का आफ्टरशॉक आया। वहीं, थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में अंडर कंस्ट्रक्शन 30 मंजिला इमारत गिर गई। यहां पर 400 लोग काम कर रहे थे, जिनमें 80 से ज्यादा लापता हैं। 3 लोग मारे गए। म्यांमार में राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी हैं, लेकिन हर तरफ मलबे का ढेर, टूटी सड़कें, और ढही इमारतें नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि, अस्पतालों में घायलों की तादाद भी हजारों में है। इस विनाशकारी भूकंप ने मंडाले, नेपिटॉ, यांगून और कई अन्य शहरों में इमारतों, पुलों और सड़कों को भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन सबसे अधिक मौतें नेपिटॉ में हुई हैं। यहां से 90 से अधिक लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी इस भूकंप का प्रभाव महसूस किया गया। यहां एक 33 मंजिला निर्माणाधीन इमारत पूरी तरह गिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरते ही पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया, लोग घबराकर चीखने लगे और सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई। थाईलैंड सरकार ने इसे “भयानक त्रासदी” करार दिया और कहा कि अभी भी कुछ लोगों के जीवित होने की उम्मीद है।ग्रेटर बैंकॉक क्षेत्र की आबादी 1.70 करोड़ से अधिक है जिनमें से कई लोग ऊंची इमारतों वाले अपार्टमेंट में रहते हैं। शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे भूकंप आने पर इमारतों में अलार्म बजने लगे और घनी आबादी वाले मध्य बैंकॉक की ऊंची इमारतों एवं होटल से लोगों को बाहर निकाला गया। भूकंप इतना शक्तिशाली था कि कुछ ऊंची इमारतों के अंदरूनी हिस्सों में ‘स्वीमिंग पूल’ में पानी में लहरें उठती दिखीं। म्यांमार में कई बड़े भूकंप आए हैं। इससे पहले 2012 में 6.8 तीव्रता का भूकंप आ चुका है। 1930 से 1956 के बीच 7 तीव्रता वाले 6 से ज्यादा भूकंप आए थे।यह विनाशकारी भूकंप म्यांमार और थाईलैंड को बहुत गहरे जख्म दे गया है जिसकी भरपाई लंबे समय तक नहीं हो सकेगी।



