बंशीधर तिवारी ने उस विभाग की उन तकनीकी समस्याओं को दूर किया जिनके कारण आये दिन हड़ताल और आंदोलन होते थे। राजनीति का अड्डा कहलाने वाले इसी विभाग में आज जब आउटपुट न देने पर बंशीधर तिवारी अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हैं तो सभी उसको स्वीकार करते हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग की तस्वीर बदल कर रख दी। इसी प्रकार अन्य विभागों में भी उनकी कार्यप्रणाली के कारण उनकी लोकप्रियता है। बंशीधर तिवारी आज सरकार का और सरकार की गुड गवर्नेंस का चेहरा हैं। मीडिया के साथ बिना टकराव किये उन्होंने यहाँ की कार्य संस्कृति ही बदल डाली। अब मीडिया में ऐसा कोई नकारात्मक समाचार नहीं आता जिससे राज्य और उसके निवासियों को नुकसान होता हो। मसलन उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से प्राकृतिक आपदा की मार झेलने वाला राज्य है। आपदा आती हैं और आती रहेंगी, वो दैवीय है, वह हर बार अलग तरीके से अलग जगह आती हैं, राज्य उनको नहीं रोक सकता है, राज्य केवल डिजास्टर रिस्क रिडक्सन, और आपदा प्रबंधन पर काम कर सकता है। जिसपर राज्य मुस्तैदी से काम करता है। बंशीधर तिवारी यह बात मीडिया को समझाने में कामयाब हुए। उसी का परिणाम रहा कि चाहे केदारनाथ की आपदा हो, सिलक्यारा की घटना हो या अन्य कोई भी घटना हो उसको सनसनीखेज बनाने, टीआरपी या वीवरशिप के लिए भय पफैलाने जैसी प्रवत्ति पर लगाम लगी। राज्य के निवासियों की आय का स्रोत पर्यटन किसी भी प्राकृतिक घटना के कारण अवरू( नहीं हुआ। इसका सबसे बड़ा श्रेय यदि किसी को जाता है तो वो बंशीधर तिवारी ही हैं। उनका मीडिया समन्वय अतुलनीय हैं। पत्राकार अपनी जान और माल की हानि की परवाह किये बगैर ज़ीरो ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। अपने कार्य को करते हुए कई बार पुलिस या दंगाइयों के शिकार हो जाते हैं। उनके वाहन जला दिये जाते हैं, कैमरे तोड़ दिये जाते हैं। पिछले दो दशकों में ऐसा कई बार हुआ, लेकिन पिछले 02 वर्षाेँ में उपद्रव की मार सहने वाले पत्राकारों की सुध यदि किसी ने ली है तो वो बंशीधर तिवारी है। तो निश्चित तौर पर बंशीधर तिवारी एक बेहतर मीडिया समन्वयक होने के साथ ही एक बेहतर क्राईसेस मैनेजमेंट के मास्टर हैं। उन्होंने सि( करके दिखाया है कि वो हर उस काम को बेहतर अंज़ाम दे सकते हैं जो सरकार की छवि को जनता के बीच शानदार रूप से प्रस्तुत कर सकता हो। राज्य को ऐसे अधिकारियों की ही आवश्यकता है। बंशीधर तिवारी के बेहतर समन्वय की क्षमता की वजह से ही मुख्यमंत्राी ने अपने खास विभाग सूचना विभाग की ज़िम्मेदारी दी है। वह सूचना विभाग ही नहीं अपितु दूसरे विभागों के मुखिया के रूप में भी लोकप्रिय हैं। वह जब शिक्षा विभाग के महानिदेशक बने वो विभाग भी आंदोलनों से झुलस रहा था। अभी उनपर एक आरोप लगा है कि उन्होंने जनवरी, 2022 में 72 लाख का विज्ञापन एक गुमनाम प्रकाशन को जारी कर दिया। जबकि बंशीधर तिवारी सूचना विभाग के महानिदेशक सितम्बर 2022 को बने। ऐसा बताया जा रहा है कि बंसीधर तिवारी को जबरन टार्गेट किया जा रहा है। जनवरी का महीना चुनावी महीना था। आचार सहिंता लगने के चक्कर में हर जगह एक जल्दबाज़ी थी। यह भी सत्य है कि मार्च में नई सरकार बनने के कुछ ही महीनों के बाद बंशीधर को नया सूचना महानिदेशक बनाया गया था। बंशीधर तिवारी पहले ऐसे महानिदेशक हैं जो पत्राकारों में लोकप्रिय हैं।



