मां गंगा के निकट एक छोटे से गांव में जन्मे पदम् सिंह चौहान जिन्हें प्रोफेसर पीएस चौहान नाम से ख्याति मिली एक ऐसे शिक्षाविद व धुरंदर पत्रकार थे कि पत्रकारों की नई पीढ़ी भी उनका लोहा मानती थी।मेरे 35 वर्षो के पत्रकारिता जीवन मे शायद ही ऐसा कोई महीना बचा हो जिसमें प्रोफेसर पीएस चौहान ने मुझे फोन करके किसी ज्वलंत मुद्दे पर चर्चा न की हो।कोई भी ऐसी घटना जो टाइम्स ऑफ इंडिया की सुर्खी बन सकती हो ,उसे लेकर उनका फोन आता था,”श्रीगोपाल जी,क्या सच है इस अमुक घटना में?”उम्र में ही नही तजुर्बे व शैक्षणिक योग्यता में भी मुझसे बहुत बड़े चौहान साहब,जब मुझे “जी”कहकर संबोधित करते तो मुझे बहुत शर्म आती।मैंने उन्हें हमेशा गुरु जी ही कहा,लेकिन वास्तव में वे देश के मूर्धन्य साहित्यकार डॉ योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ जो अपभ्रंश हिंदी साहित्य के परम विद्वान है,के गुरु थे।प्रोफेसर चौहान ने उन्हें हरिद्वार में एमए में पढ़ाया था।डॉ अरुण के मन मे प्रोफेसर चौहान के प्रति बेहद का आदर भाव था और वे उन्हें अपना गुरु ही मानते रहे है।हरिद्वार प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर पी.एस. चौहान का हाल ही में 87 वर्ष की आयु में निधन हुआ तो लगा जैसे हमारे ऊपर से उनका वरदहस्त हट गया हो।उनका निधन पत्रकारिता और समाज के लिए भी अपूरणीय क्षति है। वे अंतिम समय तक सक्रिय पत्रकारिता से जुड़े रहे। उनकी धर्मपत्नी डॉ सन्तोष चौहान स्वयं में शिक्षा जगत की परम विदुषी है और एक महिला डिग्री कॉलेज की न सिर्फ प्राचार्य रही है बल्कि उन्होंने उत्तराखंड राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद को भी सुशोभित किया है। “प्रोफेसर चौहान की प्रेरणादायक कार्यशैली और सिद्धांतों के प्रति उनका समर्पण नई पीढ़ी के लिए एक आदर्श रहेगा,ऐसा मैं ही नही बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी,पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत,पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक समेत अनेक राजनेता मान रहे है। प्रोफेसर पीएस चौहान ने प्रेस क्लब हरिद्वार के अध्यक्ष रहते हुए पत्रकारों के हितों की रक्षा की और पत्रकारिता के सिद्धांतों को हमेशा महत्व दिया। वे एक अनुशासित और सिद्धांतवादी पत्रकारिता के पक्षधर रहे, जो पत्रकारों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत बना। हरिद्वार के एसएम जैन कॉलेज के प्राचार्य के रूप में भी उन्होंने कॉलेज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और शैक्षिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रोफेसर पीएस चौहान निष्पक्ष, निर्भीक व स्वच्छ पत्रकारिता के जनक रहे है।तभी तो उन्हें पत्रकारिता का सर्वोच्च गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान से भी नवाजा गया था।विभिन्न हिंदी व अंग्रेजी पत्र -पत्रिकाओं में नियमित लेखन व पत्रकारिता करते रहे प्रोफेसर चौहान की सुस्पष्ट लेखनी के सभी कायल रहे।इकहरे बदन के चौहान साहब हमेशा खुश व सन्तुष्ट रहने वाले इंसान थे,जिनका हम सबके बीच से अलविदा होना,पत्रकारिता ही नही शिक्षा जगत की भी बड़ी क्षति है।उन्हें मेरा शत शत नमन।



