Close Menu
Pahad Ki KhabarPahad Ki Khabar
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • देश
  • शिक्षा
  • खेल
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • व्यापार
  • क्राइम
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube WhatsApp
ब्रेकिंग न्यूज़ -
  • एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने तथा शतप्रतिशत् होमडिलिविरी सुनिश्चित करवाने के जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशों के अनुपालन में जिले में क्षेत्रवार क्यूआरटी टीम
  • परेडग्राउंड आटोमेटेड पार्किंग जनमानस को विधिवत् समर्पित; मा0 मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण
  • मिलेट्स और कृषि गतिविधियां बन रहे सहकारिता के मजबूत आधार, रेशम, साइलेज व सामूहिक खेती से मजबूत होगी किसानों की आर्थिकी
  • अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने किया भाजपा विधायक ऋतू खंडूड़ी के आवास का घेराव
  • ओपनएआई के सहयोग से यूपीईएस बना ‘एआई-फर्स्ट’ कैंपस शिक्षण, सीखने, शोध और छात्र अनुभव को बदलने के लिए चैटजीपीटी एजु को अपनाया
  • मुख्यमंत्री के भिक्षावृत्तिमुक्त राज्य के संकल्प को साकार करता जिला प्रशासन का आधुनिक इंटेंसिव केयर
  • मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को फरवरी और मार्च महीने की धनराशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर
  • पूर्णागिरी मेला क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग का सघन निरीक्षण अभियान
  • क्या देश में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पर्वतीय पर्यटन परिपथों का विकास करने का प्रस्ताव है?
  • पंचम चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर दीपलोक कॉलोनी में “माँ शक्ति आराधना संध्या महोत्सव” का आयोजन !
Tuesday, March 24
Facebook X (Twitter) Instagram
Pahad Ki KhabarPahad Ki Khabar
Demo
  • होम
  • उत्तराखण्ड
  • देश
  • शिक्षा
  • खेल
  • स्वास्थ्य
  • मनोरंजन
  • व्यापार
  • क्राइम
Pahad Ki KhabarPahad Ki Khabar
Home»राज्य समाचार»उत्तराखण्ड»23 सालों में भी आत्मनिर्भर नही बन पाया उत्तराखंड!
उत्तराखण्ड

23 सालों में भी आत्मनिर्भर नही बन पाया उत्तराखंड!

Pahad ki KhabarBy Pahad ki KhabarNovember 14, 2023No Comments
Facebook Twitter WhatsApp Telegram
Share
Facebook Twitter Telegram WhatsApp

For more information, click on the Image

उत्तराखंड राज्य को बने 23 वर्ष हो गए लेकिन आज तक भी उत्तराखंड आत्मनिर्भरता प्राप्त नही कर सका।विकास पुरूष नारायण दत्त तिवारी ने अपने शासनकाल में राज्य के अंदर जो औद्योगिक नगर बसाए थे उनमें से करीब 400 औद्योगिक इकाइयां बंद हो चुकी है या फिर पलायन कर चुकी है,एक तरफ ये इकाइयां एक एक कर बंद हो रही थी दूसरी तरफ राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विदेशों में निवेश के एमओयू साइन करवा रहे थे।विदेशों व मुंबई जैसे महानगरों के निवेशक कब उत्तराखंड आएंगे यह तो पता नही ,लेकिन जो उद्योग लगे हुए है उनका बंद होना निश्चित ही चिंता जनक है।यही हाल उपभोक्ता अदालतों भी है ,हरिद्वार जिले में एक साल से उपभोक्ता अदालत में जज व अब सदस्य भी न होने के कारण सुनवाई ठप्प है,यही हालत देहरादून जिला उपभोक्ता आयोग व अन्य जिलों में भी है,लेकिन सरकार की सेहत पर कोई फर्क नही पड़ रहा है।किसानों के बकाया गन्ना मूल्य भुगतान व नया गन्ना मूल्य घोषित न होने व बाढ़ पीड़ित किसानों का मुआवजा बढाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत तक की आवाज सरकार सुनने को तैयार नही है।राज्य के कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली को लेकर आंदोलन कर रहे है,लेकिन कोई सुनवाई नही ,ऐसे में राज्य स्थापना दिवस पर चेहरे पर रौनक कैसे आ सकती है।आज 23 साल बीतने पर भी उत्तराखंड में न तो स्थाई राजधानी बन पाई और न ही उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण का काम पूरा हो पाया। राज्य आंदोलन के शहीदों तक को आज तक इंसाफ न मिलना सरकार की विफलता ही कही जाएगी ।उत्तराखंड में सरकार किसी की भी रही हो ,उत्तराखंड के मूलभूत सरोकार आज भी ज्यो के त्यों है।
गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी तो घोषित कर दिया गया था, लेकिन स्थायी राजधानी के मुद़्दे को आज तक भी हल नही किया गया है। हालांकि कांग्रेस एलान कर चुकी है कि गैरसैंण को वह स्थायी राजधानी घोषित करेगी। लेकिन कब,इस पर वह भी मौन है,जवाब में सत्ता पक्ष भाजपा ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी ने घोषित किया था, लेकिन स्थायी राजधानी किसी ने नही बनाई।यह राजधानी कब बनाएगी ,इसका कोई जवाब सत्ता किसी के पास नही है।ग्रीष्म कालीन सत्र भी जरूरी नही सरकार गैरसैंण बुलाये,कई बार ये सत्र भी देहरादून में ही बुला लिए जाते है।जबकि गैरसैंण में राजधानी के नाम पर दो सौ करोड़ से अधिक विधानसभा भवन व अन्य भवनों के नाम पर खर्च हो चुका है।
उत्तराखंड की राजनीति इन दिनों करवट लेती दिख रही है।इसमें कुछ ऐसे बदलावों के संकेत मिल रहे हैं जो न सिर्फ़ प्रदेश के राजनीतिक बल्कि यहां के सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय परिदृश्य को भी पूरी तरह से पलटने की क्षमता रखते हैं।आज़ादी से 17 साल पहले वीर चंद्र सिंह ‘गढ़वाली’ नाम के एक राष्ट्रभक्त अंग्रेज़ों की फौज में हुआ करते थे।वे उन दिनों ‘रॉयल गढ़वाल राइफल’ की एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे।
इस टुकड़ी को पेशावर में पठान स्वतंत्रता सेनानियों को कुचलने का आदेश दिया गया था।23 अप्रैल सन 1930 के दिन जब अंग्रेज़ों ने पठानों पर गोलियां चलाने का हुक़्म दिया तो वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने इस हुक्म को मानने से इंकार कर दिया।
उन्होंने बग़ावत करते हुए ‘गढ़वाली सीज़फायर’ का उदघोष किया जिस पर गढ़वाली फौज ने निहत्थे पठानों पर गोलियां दागने से इनकार कर दिया। इस बग़ावत को इतिहास में ‘पेशावर कांड’ के नाम से जाना जाता है। इस मौजूदा राजनीतिक हलचल का केंद्र वही भराड़ीसैंण है ,जिसे चंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर ‘चंद्रनगर’ भी कहा जाता है।इसी महान शख्सियत चन्द्रसिंह गढ़वाली का सपना था कि ‘पहाड़ की राजधानी, पहाड़ में ही हो।’ वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ही उन लोगों में थे जिन्होंने सबसे पहले गैरसैंण में प्रदेश की राजधानी की मांग की थी। गैरसैंण चमोली ज़िले का एक ऐसा पहाड़ी शहर है जो गढ़वाल और कुमाऊं की सीमा पर बसा है।
सन 1990 के आस पास जब पृथक राज्य की मांग उग्र रूप ले रही थी, तब से ही इस प्रस्तावित राज्य उत्तराखंड की राजधानी के रूप में गैरसैंण को देखा जा रहा था। तभी तो 25 जुलाई सन 1992 के दिन तो ‘उत्तराखंड क्रांति दल’ ने गैरसैंण को अपने दल की ओर से पहाड़ की राजधानी घोषित किया और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर इस शहर का नाम ‘चंद्र नगर’ रखते हुए राजधानी क्षेत्र का शिलान्यास भी किया था।इसके बाद कई आंदोलन हुए और अलग राज्य की स्थापना 9 नवंबर सन 2000 में हो गई। लेकिन देहरादून को अस्थायी राजधानी का नाम देने से स्थायी राजधानी का मुद्दा सुलझने की जगह और भी ज़्यादा उलझता चला गया।यानि अब यह साफ हो गया है कि बिना संसाधनों वाले और आर्थिक रूप से कमजोर उत्तराखंड में अब एक नहीं दो-दो राजधानी का बोझ झेलना पड़ रहा है। तत्कालीन त्रिवेंद्र सरकार ने गैरसैंण को सिर्फ ग्रीष्म कालीन स्वीकार किया। जो उत्तराखंड के लिए एक घाव की तरह बनकर रह गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन महारा का कहना है कि कांग्रेस सत्ता में आने पर गैरसैंण को पूर्ण राजधानी बनाएगी।
ग्रीष्म कालीन राजधानी पर तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा था कि यह फैंसला भविष्य के द्वार खोलेगा। उन्होंने कहा था कि यह फैसला इसलिए लिया गया, ताकि उत्तराखंड निर्माण का लाभ दूरस्थ इलाकों को भी मिल सके।तब त्रिवेंद्र बोले थे , गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के बाद सरकार यहां राजधानी के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाने का काम करेगी। विशेषज्ञों और टाउन प्लानरों के साथ बैठकर यहां के विकास का खाका तैयार होगा। उनका मानना था कि अभी गैरसैंण-भराड़ीसैण क्षेत्र राजधानी का दबाव सहने की स्थिति में नहीं है। इसलिए सरकार का फोकस यहां अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर रहेगा। यहां राजधानी की सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से जोड़ी जाएंगी, इसमें कुछ समय लगेगा। पता किया जाएगा कि यहां की जरूरतें क्या हैं? फिर उसी अनुरूप योजनाएं बनाई जाएंगी। लेकिन इस निर्णय से प्रदेश में अब दो राजधानियां हो गई है, साथ ही स्थायी राजधानी का मुद्दा पहेली ही बना हुआ है।वही स्थाई राजधानी की कार्ययोजना पर भी कोई प्रगति नही हो पाई।एक बार बजट सत्र के दौरान जिस प्रकार गैरसैण विधानसभा बर्फ से ढक गई थी ,उसे देखकर यही लगता है कि सरकार मौसम की बेरुखी के कारण स्थाई राजधानी के निर्णय तक नही पहुंच सकेगी। राज्य की जनता भी सरकार के ग्रीष्मकालीन शगूफे को पचा नही पा रही है।राज्य के 70 प्रतिशत लोग स्थाई राजधानी के पक्ष में है।तत्कालीन भाजपा की त्रिवेंद्र सरकार ने यह फैसला लेकर एक विवाद को तो जन्म दे दिया,लेकिन उसका हल उनके बाद के मुख्यमंत्री भी नही खोज पाए।उत्तराखंड में राजधानी का मुद्दा जनभावनाओं से जुड़ा है। राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश में गैरसैण में राजधानी बनाए जाने को लेकर आवाज उठती रही हैं। राज्य आंदोलन के समय से ही गैरसैंण को जनाकांक्षाओं की राजधानी का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि कांग्रेस और भाजपा की सरकारें गैरसैंण को कभी खारिज नहीं कर पाई।
हरीश रावत सरकार ने जब गैरसैंण में विधानमंडल भवन बनाया, तब उन पर भी राजधानी घोषित करने का दबाव बना था। राजनीतिक आंदोलन से जुड़ा एक वर्ग गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने की वकालत करता रहा है।
राज्य गठन से पहले उत्तर प्रदेश की मुलायम सरकार की गठित कौशिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में 70 प्रतिशत लोगो की पसंद गैरसैण को कहा था। वही उक्रांद ने 27 साल पहले गैरसैंण में राजधानी का शिलान्यास किया था। राज्य आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाले उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने कहा कि राज्य गठन के बाद भी जनभावनाओं की अनदेखी हुई है। सरकार गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन नहीं बल्कि स्थायी राजधानी घोषित करे।

Static 1 Static 1

For more information, click on the Image

Advertisement
Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp
Pahad ki Khabar

Related Posts

एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने तथा शतप्रतिशत् होमडिलिविरी सुनिश्चित करवाने के जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशों के अनुपालन में जिले में क्षेत्रवार क्यूआरटी टीम

March 24, 2026
Read More

परेडग्राउंड आटोमेटेड पार्किंग जनमानस को विधिवत् समर्पित; मा0 मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण

March 24, 2026
Read More

मिलेट्स और कृषि गतिविधियां बन रहे सहकारिता के मजबूत आधार, रेशम, साइलेज व सामूहिक खेती से मजबूत होगी किसानों की आर्थिकी

March 24, 2026
Read More
Leave A Reply Cancel Reply

https://pahadkikhabar.com/wp-content/uploads/2026/02/mdda1.mp4
https://pahadkikhabar.com/wp-content/uploads/2026/02/mdda2.mp4
Top Posts

एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने तथा शतप्रतिशत् होमडिलिविरी सुनिश्चित करवाने के जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशों के अनुपालन में जिले में क्षेत्रवार क्यूआरटी टीम

March 24, 2026

एलायंस फ्रांसेस देहरादून में कार्यालय स्थापित करेगा

July 8, 2023

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में ‘अपणि सरकार’ नागरिक सेवाएं आपके द्वार योजना का फ्लैग ऑफ किया।

July 8, 2023

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से शनिवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में साइकिलिस्ट आशा मालवीय ने भेंट की।

July 8, 2023
Don't Miss
उत्तराखण्ड

एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने तथा शतप्रतिशत् होमडिलिविरी सुनिश्चित करवाने के जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशों के अनुपालन में जिले में क्षेत्रवार क्यूआरटी टीम

March 24, 2026 उत्तराखण्ड

देहरादून दिनांक 24 मार्च 2026, एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने तथा शतप्रतिशत् होमडिलिविरी सुनिश्चित करवाने…

Read More

परेडग्राउंड आटोमेटेड पार्किंग जनमानस को विधिवत् समर्पित; मा0 मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण

March 24, 2026

मिलेट्स और कृषि गतिविधियां बन रहे सहकारिता के मजबूत आधार, रेशम, साइलेज व सामूहिक खेती से मजबूत होगी किसानों की आर्थिकी

March 24, 2026

अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने किया भाजपा विधायक ऋतू खंडूड़ी के आवास का घेराव

March 24, 2026
Stay In Touch
  • Facebook
  • Twitter
  • Pinterest
  • Instagram
  • YouTube
  • Vimeo

Pahad Ki Khabar is a leading Hindi online news analysis portal. Launched in 2023, and we focuses on delivering around the clock Different variety news analysis, Agriculture, Education, Business, Entertainment, Art-Literature-Culture and Media etc.

Address: 120 Lohiyapuram, Tyagi road,
Dehradun, Uttarakhand – 248001
Email Us: info@pahadkikhabar.com

Facebook X (Twitter) Instagram YouTube WhatsApp
Our Picks

एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने तथा शतप्रतिशत् होमडिलिविरी सुनिश्चित करवाने के जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशों के अनुपालन में जिले में क्षेत्रवार क्यूआरटी टीम

March 24, 2026

परेडग्राउंड आटोमेटेड पार्किंग जनमानस को विधिवत् समर्पित; मा0 मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण

March 24, 2026

मिलेट्स और कृषि गतिविधियां बन रहे सहकारिता के मजबूत आधार, रेशम, साइलेज व सामूहिक खेती से मजबूत होगी किसानों की आर्थिकी

March 24, 2026
Most Popular

एलपीजी गैस की कालाबाजारी रोकने तथा शतप्रतिशत् होमडिलिविरी सुनिश्चित करवाने के जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशों के अनुपालन में जिले में क्षेत्रवार क्यूआरटी टीम

March 24, 2026

एलायंस फ्रांसेस देहरादून में कार्यालय स्थापित करेगा

July 8, 2023

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में ‘अपणि सरकार’ नागरिक सेवाएं आपके द्वार योजना का फ्लैग ऑफ किया।

July 8, 2023
© 2026 Pahad Ki Khabar All Rights Reserved.
  • होम
  • About Us
  • Terms and Conditions
  • Privacy Policy
  • Contact Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.