मुंबई, 10 फरवरी 2026।
यूपीईएस देहरादून, जो एक अग्रणी मल्टी-डिसिप्लिनरी और रिसर्च यूनिवर्सिटी है, ने मुंबई में अपने रणनीतिक नेतृत्व मंच ‘दृष्टिकोण’ के दूसरे संस्करण का सफल आयोजन किया। यह एक इनवाइट-ओनली, क्लोज़्ड-डोर लीडरशिप फोरम है, जिसे एक “थिंकिंग रूम” के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जहाँ वरिष्ठ इंडस्ट्री लीडर्स और यूपीईएस का अकादमिक नेतृत्व भविष्य के काम, टैलेंट और लर्निंग के बदलते स्वरूप पर खुलकर चर्चा करते हैं।
‘दृष्टिकोण 2.0’ की थीम थी — “द कॉन्फ्लुएंस ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड ह्यूमन इंटेलिजेंस”। इस संस्करण का केंद्रबिंदु था कि एआई-ड्रिवन दुनिया में लीडरशिप और लर्निंग की भूमिका किस प्रकार बदल रही है, और इस परिवर्तन में ह्यूमन जजमेंट, एथिक्स और अकाउंटेबिलिटी की क्या अहमियत है।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ कॉरपोरेट लीडर्स शामिल हुए, जिनमें सुमित कपूर (पार्टनर, रिस्क एडवाइजरी, केपीएमजी इन इंडिया), समीर पितळवाला (हेड ऑफ गेमिंग – एपीएसी, गूगल क्लाउड), लक्ष्मी देशपांडे (हेड ऑफ एक्सआर इनोवेशन एंड डिज़ाइन, टीसीएस), जी. एस. सेल्विन (एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, रोल्स-रॉयस इन इंडिया एवं एमडी, एमटीयू इंडिया), डॉ. निलय रंजन (हेड सीएसआर एंड सस्टेनेबिलिटी, एयर इंडिया), हरजीत खंडूजा (एसवीपी-एचआर, जियो), अज़मीना पोद्दार (मैनेजिंग डायरेक्टर – एक्सपीरियंस डिज़ाइन, जेपीमॉर्गन चेज़) और रवि हेमनानी (वीपी-एचआर एवं हेड, टैलेंट एंड लर्निंग, नुवोको विस्टास कॉर्प. लिमिटेड) शामिल रहे।
तीन प्रमुख बोर्डरूम चर्चाएँ
इस शाम तीन आपस में जुड़ी बोर्डरूम चर्चाएँ आयोजित की गईं:
1. एआई एंड एक्जीक्यूटिव जजमेंट:
इस सत्र में चर्चा हुई कि एआई किस प्रकार निर्णय-प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है और किन क्षेत्रों में ह्यूमन जजमेंट की स्पष्ट, नॉन-नेगोशिएबल सीमाएँ तय की जानी चाहिए—विशेषकर एथिक्स, अकाउंटेबिलिटी और कॉन्टेक्स्चुअल इंटेलिजेंस के संदर्भ में।
2. द लर्निंग पैराडाइम एंड एआई-फर्स्ट टैलेंट:
इसमें बदलते हायरिंग ट्रेंड्स, करिकुलम डिज़ाइन, स्टूडेंट एंगेजमेंट और संस्थागत एआई स्टैक—इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटेलिजेंस, इंटीग्रेशन और इम्पैक्ट—पर विस्तार से मंथन हुआ।
3. इंडस्ट्री-अकाडेमिया कन्वर्जेन्स:
इस चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि सहयोग के मॉडल्स को ट्रांजैक्शनल एंगेजमेंट से आगे बढ़ाकर को-क्रिएशन और फ्यूचर वर्कफोर्स डिज़ाइन की दिशा में ले जाना होगा, ताकि दीर्घकालिक क्षमता निर्माण सुनिश्चित हो सके।
एआई तेज़, पर मानव निर्णय केंद्र में
सुमित कपूर (केपीएमजी) ने कहा, “एआई तथ्य-आधारित निर्णयों में सहायता कर सकता है, लेकिन अंतिम जवाबदेही इंसानों की ही होगी। लीडर्स को ऐसे ‘इंटेलिजेंट प्रॉब्लम्स’ टेबल पर लाने होंगे, जिनसे एआई की संभावनाएँ सही संदर्भ में खुल सकें।”
जी. एस. सेल्विन (रोल्स-रॉयस/एमटीयू इंडिया) ने कहा, “एआई गति और निरंतरता बढ़ा सकता है, लेकिन निर्णय-प्रक्रिया में कॉन्टेक्स्ट, वैल्यूज़ और परिणामों की समझ जरूरी है। इसलिए ‘ह्यूमन-इन-द-लूप’ अनिवार्य है।”
अज़मीना पोद्दार (जेपीमॉर्गन चेज़) ने भी स्पष्ट किया कि फाइनेंशियल सेक्टर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में एआई के व्यापक उपयोग के बावजूद अंतिम भरोसा अभी भी मानव भूमिका पर ही टिका है।
यूपीईएस की भूमिका
कार्यक्रम की शुरुआत यूपीईएस के वाइस चांसलर डॉ. सुनील राय के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा, “जब एआई जैसी तकनीकें लीडरशिप और लर्निंग को मूल रूप से बदल रही हैं, तब हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसकी क्षमता का उपयोग समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए करें। हम केवल छात्रों को आज की नौकरियों के लिए तैयार नहीं करते, बल्कि भविष्य के काम को परिभाषित करने वाली चर्चाओं में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।”
उन्होंने कहा कि ‘दृष्टिकोण’ का उद्देश्य इंडस्ट्री और अकादमिक जगत के बीच मजबूत और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी स्थापित करना है, ताकि “यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो” के विज़न के अनुरूप भविष्य के नेतृत्वकर्ता तैयार किए जा सकें।
निष्कर्ष
‘दृष्टिकोण 2.0’ से यह स्पष्ट संदेश उभरकर आया कि एआई कार्य-प्रणाली को तेजी से बदल रहा है, लेकिन अंतिम परिणाम, जवाबदेही और नैतिक निर्णयों में मानव की केंद्रीय भूमिका बनी रहेगी। यह मंच यूपीईएस को एक ऐसे संस्थान के रूप में स्थापित करता है, जो एआई युग में इंडस्ट्री-अकादेमिया समन्वय को नई दिशा दे रहा है।
अधिक जानकारी के लिए: www.upes.ac.in



