कभी सुना था चौपालों मे
ठहाके लगा कर कहते लोगों से
जिसकी लाठी उसकी भैंस
अब समझ आया की
हमारी हंसी बेबुनियाद थी क्योंकि
सच मे आज जिसके पास
ताकत है उसके लिये
कोई भी नियम
लागू कहाँ होता. है
वो तो हाँकता है अपनी लाठी से
हमारी
मजबूरियों की भैंस को
अनीता चमोली
देहरादून उत्तराखंड



