स्थायी एसडीएम की तैनाती न होने से पोखरी तहसील फिलहाल प्रभारी व्यवस्था पर चल रही है
पोखरी। क्षेत्रीय जनता के लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 1998 में अस्तित्व में आई पोखरी तहसील एक बार फिर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होती नजर आ रही है। दिग्गज नेताओं की गृह तहसील होने के बावजूद यहां स्थायी रूप से उपजिलाधिकारी (एसडीएम) की तैनाती न होना लोगों में गहरी नाराजगी का कारण बन गया है। जिलाधिकारी के आदेश के बाद यहां तैनात उपजिलाधिकारी अबरार अहमद का गैरसैंण तहसील में स्थानांतरण कर दिया गया है, जबकि पोखरी तहसील का प्रभार कर्णप्रयाग के एसडीएम को सौंपा गया है। इसके चलते तहसील अब प्रभारी व्यवस्था के भरोसे चल रही है, जिससे स्थानीय लोगों के प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला और पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी जैसे प्रमुख नेताओं की गृह तहसील होने के बावजूद यह स्थिति क्षेत्रीय जनता को अखर रही है।जनप्रतिनिधियों का कहना है कि बार-बार प्रभारी एसडीएम के भरोसे तहसील को चलाना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। किमोठा के प्रधान हरिकृष्ण किमोठी, नगर पंचायत अध्यक्ष सोहन लाल, जिला पंचायत सदस्य एवं व्यापार मंडल अध्यक्ष बीरेंद्र सिंह राणा, प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष तेजपाल रावत निर्मोही, व्यापार मंडल के जिला महामंत्री कुंवर सिंह चौधरी, राज्य महिला आयोग की सदस्य वत्सला सती, टैक्सी यूनियन अध्यक्ष विजयपाल सिंह रावत, राज्य आंदोलनकारी संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष कुंवर सिंह खत्री, पूर्व प्रमुख नरेंद्र रावत और विधायक प्रतिनिधि धीरेन्द्र राणा समेत कई जनप्रतिनिधियों ने इस पर नाराजगी जताई है। गौरतलब है कि वर्ष 1998 से पहले पोखरी क्षेत्र चमोली तहसील के अंतर्गत आता था। उस समय लोगों को मूल निवास, चरित्र प्रमाण पत्र, हैसियत प्रमाण पत्र, खाता-खतौनी की नकल सहित अन्य राजस्व कार्यों के लिए दूर चमोली जाना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी।इन्हीं समस्याओं को देखते हुए क्षेत्रीय जनता ने लंबे समय तक आंदोलन किया, जिसके बाद पोखरी को तहसील का दर्जा मिला। तहसील बनने के बाद यहां प्रशासनिक सुविधाएं बेहतर हुईं और लोगों को स्थानीय स्तर पर ही राहत मिलने लगी। शुरुआती वर्षों में यहां नियमित रूप से एसडीएम और तहसीलदार की तैनाती होती रही, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह व्यवस्था अस्थिर बनी हुई है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि अधिकारी यहां लंबे समय तक टिकना नहीं चाहते और सिफारिश के आधार पर जल्द स्थानांतरण करवा लेते हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती रहती है। वर्तमान में नायब तहसीलदार को तहसीलदार का प्रभार दिया गया है।क्षेत्रीय जनता और जनप्रतिनिधियों ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर पोखरी तहसील में शीघ्र स्थायी एसडीएम की तैनाती की मांग की है।



