कभी कभी सोचती हूँ
मै भावनाओं की किताब तो नही
पढने पर फिर क्यूँ लगाते है मोल मेरा
मेरे अनमोल प्रेम का ये हिसाब तो नही
मैने तो. लुटा दिया पूरा
जीवन सबको खुशियाँ लुटाने मे
मेरा भ्रम था ये की मै रहती हूँ
सबके मन मे
लेकिन जब भटकी दर ब दर तब जाना
आशियाना नही मेरा अपने ही चमन मे
अनीता चमोली
उत्तराखंड देहरादून



