अप्रैल–मई में बढ़ सकती हैं वनाग्नि की घटनाएं
मॉनिटरिंग से लेकर तकनीक तक मजबूत की गई तैयारी
देहरादून। मार्च महीने के समाप्त होते ही प्रदेश में तापमान बढ़ने की आशंका ने वन विभाग को अलर्ट मोड में ला दिया है। आगामी फॉरेस्ट फायर सीजन को देखते हुए विभाग ने इस बार पहले से ज्यादा सक्रिय रणनीति अपनाते हुए 13 जिलों के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल नियुक्त किया है, ताकि जंगलों में आग की घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सके।हर साल 15 फरवरी से शुरू होने वाले वनाग्नि सीजन में इस बार शुरुआत अपेक्षाकृत राहत भरी रही। फरवरी के अंत और मार्च की शुरुआत में हुई हल्की बारिश के चलते जंगलों में नमी बनी रही, जिससे आग की घटनाएं कम दर्ज की गईं। हालांकि अब तापमान में संभावित बढ़ोतरी और जंगलों में बढ़े ‘फ्यूल लोड’ ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है।इसी के मद्देनजर प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) की ओर से आदेश जारी कर आठ वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पांडे को अल्मोड़ा, सुरेंद्र मेहरा को पौड़ी गढ़वाल और हरिद्वार, तथा मीनाक्षी जोशी को पिथौरागढ़ जिले का नोडल बनाया गया है।वहीं मुख्य वन संरक्षक स्तर पर संजीव चतुर्वेदी को नैनीताल और उधम सिंह नगर, पीके पात्रो को टिहरी और देहरादून, राहुल को उत्तरकाशी, बीजू लाल को चंपावत और बागेश्वर, तथा विनय भार्गव को रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।विभागीय निर्देशों के अनुसार सभी नोडल अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में वनाग्नि की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी। फील्ड भ्रमण के साथ ही स्थानीय वन अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर रोकथाम और नियंत्रण के प्रयासों की नियमित समीक्षा भी करनी होगी। साथ ही हर महीने विस्तृत रिपोर्ट वन मुख्यालय को भेजना अनिवार्य किया गया है।वन विभाग का मानना है कि अप्रैल और मई के महीनों में तापमान बढ़ने के साथ आग की घटनाएं तेजी पकड़ सकती हैं। इस बार जंगलों में सूखी पत्तियों और घास की मात्रा अधिक होने से आग फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।हालांकि विभाग का दावा है कि इस बार वनाग्नि से निपटने के लिए पहले से बेहतर तैयारी की गई है। सभी वन प्रभागों में आवश्यक उपकरणों की खरीद समय से पूरी कर ली गई है, कर्मचारियों का बीमा किया गया है और आधुनिक तकनीकों के जरिए आग की त्वरित सूचना और निगरानी की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।वन विभाग को उम्मीद है कि बेहतर समन्वय, तकनीकी सहायता और सख्त मॉनिटरिंग के जरिए इस बार वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।



