देश में उत्तराखंड समान नागरिक संहिता की राह पर चलने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है। धामी सरकार उत्तराखंड में समान नागरिक आचार संहिता (यूसीसी) को भी लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति ने कहा है कि जनवरी में वह सरकार को समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट सौंप देगी। सीएम धामी ने कहा कि ड्राफ्ट मिलने के बाद जो भी औपचारिकताएं होंगी, उन्हें पूरा किया जाएगा। इसके बाद विधानसभा सत्र बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मूल निवास के विषय पर भी उच्च स्तरीय समिति का गठन कर रही है। माना जा रहा है कि 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद यह रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। प्रदेश सरकार ने मूल निवास संबंधी सभी कार्यों के समाधान के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन करने का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी राज्य के हित में होगा, वह कार्य किया जाएगा। साथ ही सरकार भू कानून पर मिली सुभाष कुमार समिति की रिपोर्ट के अध्ययन के लिए भी एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जा रही है, जो इस पर कार्य करेगी। उत्तराखंड सरकार ने 27 मई, 2022 को समान नागरिक संहिता की संभावनाएं तलाश कर इसे तैयार करने के लिए और नागरिकों के सभी निजी मामलों से जुड़े कानूनों की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। इस विधेयक को देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड या कॉमन सिविल कोड की बहुचर्चित कल्पना को साकार करने की नींव के पत्थर माना जा रहा है। लेकिन इस पर विधान सभा में चर्चा से पहले ही राजनीतिक और धार्मिक हंगामा होने के आसार लग रहे हैं। यानी 2024 के लोक सभा चुनाव से पहले कानून का ये बड़ा सियासी मुद्दा बन सकता है। इन नए कानून के तहत तलाक सिर्फ कानूनी प्रक्रिया से ही होगा। यानी देश में तलाक़ के सारे धार्मिक तरीके अवैध होंगे। इस्लाम या किसी अन्य मजहब में प्रचलित तीन तलाक तो पहले ही सुप्रीम कोर्ट और फिर संसद से भी अमान्य और दंडनीय अपराध हो गया है.नए कानून की जद में तलाक ए हसन और तलाक ए अहसन भी आएंगे। यानी तलाक के ये मनमाने और एकतरफा तरीके भी गैरकानूनी माने जाएंगे। बिना विवाह किए एक साथ रहने यानी लिव इन रिलेशनशिप में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने का भी प्रावधान नए दौर के नए कानून में है। लिव इन की जानकारी सरकार को तय प्रक्रिया और तय प्रारूप के तहत देनी होगी। यानी इनके भी रजिस्ट्रेशन का प्रावधान होगा। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के तहत ही लिव इन रिलेशन की जानकारी लड़का लड़की के माता पिता के पास भी जाएगी। जानकारी न देने पर सज़ा का प्रावधान भी किया गया है। नए मसौदे में बहुविवाह, हलाला और इद्दत पर रोक लगाने का प्रावधान है। एक्सपर्ट कमेटी ने पूरे प्रदेश में सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और विशेष क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों के सुझाव लिए। समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। अब सरकार को ड्राफ्ट रिपोर्ट मिलने वाली है। कानूनी जामा पहनाने से पहले ड्राफ्ट न्याय विभाग को भेजा जाएगा। 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता कानून लागू करने का एलान किया था। उन्होंने वादा किया था कि बीजेपी की सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता कानून लागू किया जाएगा। यूसीसी को लेकर उत्तराखंड की धामी सरकार लगातार काम कर रही है। 22 जनवरी तक यूसीसी के लिए बनाई गई कमेटी रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप सकती है। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले ही यूसीसी को अमली जामा पहनाया जा सकता है। यूसीसी सीएम धामी की प्राथमिकताओं में है।



