सड़क दुर्घटना के बाद उत्पन्न हुए एक दुर्लभ एवं जानलेवा ट्रॉमैटिक लेफ्ट डायफ्रामेटिक रप्चर के मामले का सफल उपचार Shri Mahant Indiresh Hospital की ट्रॉमा टीम द्वारा किया गया। समय पर निदान, आपातकालीन सर्जरी और विशेषज्ञों की समन्वित टीमवर्क से मरीज की जान बचाई जा सकी।
मरीज में बाईं ओर डायफ्राम में लगभग 12 सेंटीमीटर का गंभीर चीरा पाया गया था, जिसके कारण पेट और आंतों के हिस्से छाती की गुहा में पहुंच गए थे। इसके साथ ही मरीज को दोनों पैरों की टिबिया हड्डियों में फ्रैक्चर भी था।
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रॉमैटिक डायफ्रामेटिक हर्निया पॉलीट्रॉमा मरीजों में कम पाया जाने वाला लेकिन अत्यंत गंभीर मामला होता है, जिसकी पहचान में देरी होने पर सांस लेने में दिक्कत, आंतों के फंसने और अन्य जानलेवा जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति लगभग 0.8 से 5 प्रतिशत थोराकोएब्डॉमिनल ट्रॉमा मामलों में देखी जाती है।
मरीज का प्रारंभिक उपचार इमरजेंसी विभाग के विभागाध्यक्ष Dr. Ashutosh Singh द्वारा किया गया। सर्जरी ट्रॉमा सर्जन Dr. Santhosh के नेतृत्व में सम्पन्न हुई, जिसमें Dr. Prakhar Raj Gangola एवं Dr. Matrayi Godiyal ने सहयोग किया।
ऑर्थोपेडिक टीम में Dr. Shifa Hasan और Dr. Arpit Vishnoi शामिल रहे। नर्सिंग एवं ऑपरेशन थिएटर टीम के समन्वित प्रयासों से यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।



