कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी एक बार फिर नई सियासी पारी खेलने के लिए तैयार हैं। लेकिन इस बार सोनिया लोकसभा से नहीं बल्कि राज्यसभा से निर्वाचित होकर संसद पहुंचेंगी । सोनिया गांधी पहली बार राज्यसभा सांसद बनने जा रही हैं। बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के रिटायर होने की वजह से राजस्थान की सीट रिक्त हुई है। बुधवार को सोनिया गांधी ने राजस्थान से राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर जयपुर से अपना नामांकन दाखिल किया है। सोनिया इससे पहले उत्तर प्रदेश में रायबरेली की लोकसभा सीट से निर्वाचित होती रही हैं। वह इंदिरा गांधी के बाद राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने वाली गांधी परिवार की दूसरी सदस्य होंगी। सोनिया गांधी 2004 से ही रायबरेली सीट का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 1998 से 2022 के बीच लगभग 22 वर्षों तक वो कांग्रेस अध्यक्ष रहीं। सोनियां पांच बार लोकसभा सांसद रहीं। नामांकन के दौरान सोनिया गांधी ने एफिडेविट में अपनी संपत्ति के बारे में जानकारी दी । एफिडेविट में सोनिया गांधी ने बताया कि इटली के लुसियाना में उनकी संपत्ति है। साथ ही पिता की संपत्ति में भी उन्होंने अपना हिस्सा बताया है। सोनिया गांधी के पास कुल 12.53 करोड़ रुपये की संपत्ति है। लोकसभा चुनाव की तुलना में पांच साल में उनकी चल और अचल संपत्ति में 72 लाख रुपये का इजाफा हुआ है। साल 2019 में सोनिया गांधी ने रायबरेली से चुनाव लड़ा था। इस दौरान उन्होंने चुनावी एफिडेविट में बताया था कि उनकी संपत्ति 11.81 करोड़ रुपये है। सोनिया के पास 88 किलो चांदी और 1267 ग्राम सोना और अन्य ज्वेलरी होना बताया गया है। शपथ पत्र में सोनिया गांधी ने यह भी बताया है कि उनके पास खुद का कोई वाहन नहीं है। आमदनी के रूप में उन्हें किताबों से रायल्टी मिलती है। इसमें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से 1.69 लाख रुपये की रॉयल्टी मिलना बताया गया है। उनके पास अब भी नई दिल्ली के डेरामंडी गांव में तीन बीघा कृषि जमीन है जिसकी कुल बाजार कीमत 5.88 करोड़ बताई गई है। वहीं सोनिया गांधी के खिलाफ नेशनल हेराल्ड मामले में एक केस पेंडिंग है। एफिडेविट के मुताबिक नई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में धारा 420, 120 बी, 403, 406 के तहत केस पेंडिंग है।
लोकसभा से पहले राज्यसभा चुनाव में “शह-मात” का खेल
लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस राज्यसभा के चुनाव में सामाजिक समीकरण साधने में लगी हुई है। राज्यसभा की 56 सीटों के लिए 27 फरवरी को चुनाव होना है । 15 राज्यों के 56 सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 15 फरवरी को खत्म हो गई है और 20 फरवरी तक नामांकन पत्र वापस लिए जा सकते हैं। कई सांसदों का निर्विरोध चुना जाना तय है, जबकि यूपी, कर्नाटक, हिमाचल और महाराष्ट्र में चुनाव के लिए सियासी दलों के बीच शह-मात का खेल होगा। राज्यसभा में सबसे ज्यादा 10 सीटें उत्तर प्रदेश में खाली हैं। इसके बाद महाराष्ट्र और बिहार में 6-6, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 5-5, कर्नाटक और गुजरात में 4-4, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान में 3-3, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में 1-1 सीट खाली है। राज्यसभा में एनडीए के सांसदों की संख्या 114 है, जिसमें भाजपा के 93 सांसद हैं। कांग्रेस के 30 सांसद हैं। भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने मनपसंद नेताओं को राज्यसभा (उच्च सदन) भेजने में लगी हुई है। दोनों पार्टियों की ओर से राज्यसभा चुनाव में कई नाम चौंकाने वाले रहे । राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची के माध्यम से भाजपा ने सामाजिक समीकरण और जातिगत आधारों को साधने का काम किया है। समाज के पिछड़े दलित और अन्य वर्गों को प्रतिनिधित्व देते हुए पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह समान रूप से सभी के लिए कार्य कर रही है और समाज के सभी वर्ग उसके लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश के साथ-साथ गुजरात और महाराष्ट्र से भी सभी वर्गों को शामिल करने की कोशिश की गई है। राज्यसभा में सबसे ज्यादा सांसद भेजने की क्षमता वाली बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से आठ उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, जिनमें पूर्व कांग्रेस मंत्री आरपीएन सिंह, सुधांशु त्रिवेदी, चौधरी तेजवीर सिंह, साधना सिंह, अपमरपाल मौर्य, संगीता बलवंत, नवीन जैन और संजय सेठ शामिल हैं। इसके अलावा बिहार (भीम सिंह, धर्मशीला गुप्ता), छत्तीसगढ़ (राजा देवेंद्र प्रताप सिंह), हरियाणा (सुभाष बरला), कर्नाटक (नरायण कृष्णासा भांडगे), उत्तराखंड (महेंद्र भट्ट), पश्चिम बंगाल (शमिक भट्टाचार्य), गुजरात (जेपी नड्डा, गोविंदभाई ढोलकिया, मयनभाई नायक, जसवंत सिंह परमार), महाराष्ट्र (अशोक चव्हाण, मेधा कुलकर्णी, अजीत गोपछदे), ओडिशा (अश्विनी वैष्णव), मध्य प्रदेश (एल मुरुगन), राजस्थान (चुन्नीलाल ग्यारसिया, मदन राठौर) भी राज्यसभा सांसद के उम्मीदवारों का एलान किया गया है। कर्नाटक से केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर और उत्तराखंड से अनिल बलूनी को इस बार टिकट नहीं मिला है। लोकसभा चुनाव से पहले महेंद्र भट्ट को उम्मीदवार बनाए जाने के सियासी मायने हैं। भट्ट ब्राह्मण चेहरा हैं और भाजपा केंद्रीय नेतृत्व का उन्हें राज्यसभा में भेजे जाने के फैसले को जातीय समीकरणों में संतुलन साधने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। धर्मेंद्र प्रधान, भूपेन्द्र यादव, मनसुख मांडविया, पुरुषोत्तम रूपाला और केंद्रीय मंत्री नारायण राणे जैसे सात केंद्रीय मंत्रियों सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और निवर्तमान राज्यसभा सांसदों को पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है। चर्चा है कि यह लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। राज्यसभा चुनावों में भी बीजेपी कुछ वैसे ही एक्सपेरिमेंट कर रही है, जैसा 2023 के विधानसभा चुनावों में देखने को मिला था। खासकर मध्य प्रदेश और राजस्थान चुनाव में। बीजेपी ने दोनों ही राज्यों में बड़े नेताओं, जिनमें केंद्रीय मंत्री भी शामिल थे, को विधानसभा चुनाव में उतार दिया था। बीजेपी का ये प्रयोग सफल भी रहा। अब लोक सभा चुनाव के लिए तो ज्यादा से ज्यादा फ्रेश चेहरे मोर्चे पर भेजने का बीजेपी ने बंदोबस्त भी कर लिया है। वहीं कांग्रेस की ओर से पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजस्थान से आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। कर्नाटक की चार राज्यसभा सीटों पर पांच उम्मीदवार मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं। कांग्रेस ने तीन राज्यसभा प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें अजय माकन, सैयद नासिर हुसैन और जीसी चंद्रशेखर शामिल हैं। वहीं, बीजेपी और जेडीएस गठबंधन ने नारायणा कृष्णासा भांडगे और कुपेंद्र रेड्डी को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस की तीन राज्यसभा सीटों के लिए पर्याप्त नंबर हैं, लेकिन क्रॉस वोटिंग का डर बना हुआ है। हिमाचल प्रदेश से अभिषेक मनु सिंघवी, बिहार से डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह, महाराष्ट्र से चंद्रकांत हंडोरे का नाम शामिल है। वहीं मध्य प्रदेश से अशोक सिंह, तेलंगाना से रेणुका चौधरी और एम अनिल कुमार यादव को उम्मीदवार बनाया गया है । समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश से तीन राज्यसभा सीटों के लिए पूर्व सांसद रामजीलाल सुमन, सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी आलोक रंजन और जया बच्चन को नामांकित किया है। राज्यसभा सांसद का कार्यकाल छह साल का होता है और यहां हर दो साल में 33 फीसदी राज्यों से सांसदों के लिए चुनाव होते हैं। मौजूदा समय में राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं। इनमें से 233 सदस्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश (दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू-कश्मीर) का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं, 12 सदस्यों को राष्ट्रपति नामित करते हैं। 27 फरवरी को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच राज्यसभा सदस्यों के लिए मतदान होगा। मतदान खत्म होने के बाद ही नतीजों का एलान कर दिया जाएगा।



