

अब सरकार ने इसे और भी सरल बना दिया है। यूपीआई की इस नई सुविधा को अपने मोबाइल में एक्टिवेट करके आप अपने यूपीआई में पांच व्यक्तियों को जोड़ पाएंगे। इसके बाद सभी लोग एक ही बैंक अकाउंट से यूपीआई भुगतान कर पाएंगे। इस सुविधा से उन लोगों को राहत मिलेगी जिनका अपना कोई बैंक खाता नहीं है। एक यूपीआई अकाउंट का इस्तेमाल पांच मोबाइल में किया जा सकेगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने “यूपीआई सर्किल डेलिगेट पेमेंट सर्विस’ मुहैया कराई है। यूपीआई सर्किल में दो तरह के डेलिगेशन दिए गए हैं। पहला- फुल डेलिकेशन, जिसमें सेकंडरी यूजर यूपीआई पिन एंटर करेगा। दूसरा पार्शियल डेलिगेशन- इसमें पेमेंट तभी होगा जब प्राइमरी यूजर पिन एंटर करेगा। प्राइमरी यूजर के पास सभी सेकेंडरी यूजर्स का फुल कंट्रोल होगा। उसकी परमिशन के बिना कोई सेकेंडरी यूजर पेमेंट नहीं कर पाएगा। यूपीआई सर्किल के यह रहेंगे नियम। सेकेंड्री यूजर्स को पेमेंट के लिए ऐप पासकोड या फिर बायोमेट्रिक डिटेल देना होगा। प्राइमरी यूजर अपने अकाउंट से अधिकतम 5 लोगों को पेमेंट के लिए जोड़ सकता है। यह यूपीआई लिमिट पार्शियल डेलिगेशन पर लागू होगी। देश में डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसकी बड़ी वजहों में से एक है यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस। यूपीआई की मदद से घर बैठे आसानी से एक बैंक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं। डिजिटल समय में हर दूसरे स्मार्टफोन यूजर को यूपीआई पेमेंट का तरीका भाता है। यूपीआई ऐप्स के जरिए क्यूआर कोड स्कैन करने के साथ ही सेकेंड्स भर में पेमेंट हो जाती है। भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई सर्विस काफी पॉपुलर है। अब सरकार ने इसे और भी सरल बना दिया है। यूपीआई की इस नई सुविधा को अपने मोबाइल में एक्टिवेट करके आप अपने यूपीआई में पांच व्यक्तियों को जोड़ पाएंगे। इसके बाद सभी लोग एक ही बैंक अकाउंट से यूपीआई भुगतान कर पाएंगे। इस सुविधा से उन लोगों को राहत मिलेगी जिनका अपना कोई बैंक खाता नहीं है। एक यूपीआई अकाउंट का इस्तेमाल पांच मोबाइल में किया जा सकेगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने यूपीआई सर्किल डेलिगेट पेमेंट सर्विस मुहैया कराई है। इसे नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने लॉन्च किया है। इसके जरिये एक दिन में 5,000 रुपये और एक महीने में अधिकतम 15,000 रुपये का लेनदेन किया जा सकता है। छोटी खरीदारी से लेकर बड़े शॉपिंग सेंटरों में अब अधिकांश लोग यूपीआई से ही पेमेंट करते हुए दिख जाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए अब केंद्र सरकार ने यूपीआई पेमेंट को आसान और सरल बनाया है। यूपीआई पेमेंट आने के बाद सभी का काम काफी आसान हो गया है। किसी भी तरीके की पेमेंट करनी हो किराने की दुकान से लेकर ज्वेलरी की दुकान तक कहीं पर भी यूपीआई का इस्तेमाल बड़े आसानी से हो सकता है। वही अब सरकार डिजिटल पेमेंट को और भी ज्यादा बूस्ट करने के लिए और लोगों के लिए इस फीचर को आसान बनाने के लिए एक नई फीचर को लेकर आ गई है। एक यूपीआई अकाउंट से 5 लोग पेमेंट कर सकेंगे।
सरकार ने इसके लिए ‘यूपीआई सर्किल डेलिगेट पेमेंट’ नाम का फीचर लॉन्च किया। यूपीआई सर्किल के जरिए प्राइमरी यूजर 5 लोगों को सेकेंडरी यूजर बना सकता है। सेकेंडरी यूजर हर महीने 15 हजार रुपए तक का ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। हालांकि, एक बार में 5000 रुपए तक का ही ट्रांजैक्शन किया जा सकेगा। सेकेंडरी यूजर के पास बैंक अकाउंट होना जरूरी नहीं है। सभी के घर में ऐसे बुजुर्ग, बच्चों और महिलाएं होते हैं। जिन्हें यूपीआई का इस्तेमाल करना नहीं आता। ऐसे में उन लोगों के लिए यूपीआई सर्कल फीचर काफी फायदेमंद होने वाला है जो दूसरों पर निर्भर रहते हैं। यूपीआई सर्कल फीचर आने के बाद अगर आप चाहे तो अपने यूपीआई से ही घर परिवार वालों को जोड़ सकते हैं। यह एक डेलिकेट पेमेंट सिस्टम है। जिससे प्राइमरी यूपीआई को दूसरी के साथ शेयर किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि प्रायमरी अकाउंट यूजर सर्कल से जुड़ने वाले दूसरे सेकेंडरी यूजर्स के यूपीआई पेमेंट को कंट्रोल कर पाएगा। मान लीजिए आप एक पेरेंट हैं और अपने बच्चे के कॉलेज की फीस और जरूरत का खर्च देते हैं या आप एक सीनियर सिटिजन हैं, जो डिजिटल पेमेंट करने में सहज नहीं है। या एक बिजी व्यक्ति हैं, जो घरेलू खर्च की जिम्मेदारी दूसरों को सौंपना चाहता है। या एक बिजनेस ओनर हैं, जो अपने कर्मचारियों को छोटा-मोटा कैश नहीं देना चाहता। आपके जैसे सभी लोग यूपीआई सर्किल के जरिए अपने ऊपर डिपेंड लोगों को अपने बैंक अकाउंट का एक लिमिट तक एक्सेस दे सकता है। आप जिसे यूपीआई सर्किल में जोड़ेंगे, वह व्यक्ति सेकेंडरी यूजर होगा और आप प्राइमरी यूजर होंगे। इसके अलावा यूपीआई सर्किल में दो तरह के डेलिगेशन दिए गए हैं। पहला- फुल डेलिकेशन, जिसमें सेकंडरी यूजर यूपीआई पिन एंटर करेगा। दूसरा पार्शियल डेलिगेशन- इसमें पेमेंट तभी होगा जब प्राइमरी यूजर पिन एंटर करेगा। प्राइमरी यूजर के पास सभी सेकेंडरी यूजर्स का फुल कंट्रोल होगा। उसकी परमिशन के बिना कोई सेकेंडरी यूजर पेमेंट नहीं कर पाएगा। यूपीआई सर्किल के यह रहेंगे नियम। सेकेंड्री यूजर्स को पेमेंट के लिए ऐप पासकोड या फिर बायोमेट्रिक डिटेल देना होगा। प्राइमरी यूजर अपने अकाउंट से अधिकतम 5 लोगों को पेमेंट के लिए जोड़ सकता है। यह यूपीआई लिमिट पार्शियल डेलिगेशन पर लागू होगी। यूपीआई सर्किल का कूलिंग पीरियड 24 घंटे है। प्राइमरी यूजर्स चाहे, तो सेकेंड्री यूजर्स के हर लेनदेन पर नजर रख सकता है और पेमेंट पर रोक लगा सकता है।
अप्रैल 2016 में तत्कालीन आरबीआई गवर्नर डॉ. रघुराम राजन ने यूपीआई लॉन्च किया था–
यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए पैसों का लेनदेन इस समय सबसे ज्यादा चलन में है। मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म से किसी दूसरे बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने के लिए यूपीआई का इस्तेमाल किया जाता है। यह ऐसा कॉन्सेप्ट है, जो कई बैंक अकाउंट को एक मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए पैसे ट्रांसफर करने की इजाजत देता है। इसे नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने विकसित किया है। रिजर्व बैंक और इंडियन बैंक एसोसिएशन इसे नियंत्रित करते हैं। अप्रैल 2016 में तत्कालीन आरबीआई गवर्नर डॉ. रघुराम राजन ने यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस यूपीआई को लॉन्च किया था। भारत में पेमेंट ऐप से पैसों के लेनदेन के लिए इस इंटरफेस का इस्तेमाल किया जाता है। यूपीआई की सेवा लेने के लिए आपको एक वर्चुअल पेमेंट एड्रेस तैयार करना होता है। इसके बाद इसे आपको अपने बैंक अकाउंट से लिंक करना होता है। वर्चुअल पेमेंट एड्रेस आपका वित्तीय पता बन जाता है। इसके बाद आपका बैंक अकाउंट नंबर, बैंक का नाम या आईएफएससी कोड आदि याद रखने की जरूरत नहीं होती। पेमेंट करने वाला बस आपके मोबाइल नंबर के हिसाब से पेमेंट रिक्वेस्ट प्रोसेस करता है और वह पेमेंट आपके बैंक अकाउंट में आ जाता है। अगर, आपके पास उसका यूपीआई आईडी (ई-मेल आईडी, मोबाइन नंबर या आधार नंबर) है तो आप अपने स्मार्टफोन के जरिए आसानी से पैसा भेज सकते हैं। न सिर्फ पैसा बल्कि यूटिलिटी बिल पेमेंट, ऑनलाइन शॉपिंग, खरीददारी आदि के लिए नेट बैंकिंग, क्रेडिट या डेबिट कार्ड भी जरूरत नहीं होगी। ये सभी काम आप यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस सिस्टम से कर सकते हैं। यूपीआई भारत में डिजिटल भुगतान में एक क्रांति साबित हुआ है। लोग डिजिटल पेमेंट से जितना डरते थे अब उतना ही भरोसा करते हैं। यूपीआई पर लोगों का भरोसा हर साल बढ़ता जा रहा है। यूपीआई देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बना रहा है। यही कारण है कि इसकी सफलता के आठ साल में ही 10 देशों ने यूपीआई को अपना लिया है। ये देश सिंगापुर, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, हांगकांग, ओमान, कतर, सऊदी अरब, यूएई और यूके है। इन देशों में रहने वाले एनआरआई पैसे भेजने और प्राप्त करने के लिए यूपीआई का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि यूपीआई मार्केट में फोनपे और गूगल पे का दबदबा मौजूद है। डिजिटल पेमेंट को एक कदम आगे ले जाते हुए एनसीपीआई ने यूपीआई सर्किल फीचर की पेशकश की है।



