उत्तराखंड के जन जन ने
एक मशाल जलाया था
सुकुन से रहें अपनी भूमि पर
ऐसा सुन्दर परिवेश चाहा था
मर मिटे थे क्रांतिकारी अपनो के वास्ते
चल रहे थे हिम्मत से और
हौसले बुलंद थे
राजनिति की गलियों में बैठे घात लगाये
जहरीले सर्प दंश थे
माँ बहनो संग अधिकार के लिये
कर रहे हम दिल्ली मे कूच थे
दुशमनों ने भेजे राह मे
मृत्यु के दूत थे
मौत के जख्म हम वीर
हंसते हुए सह लेते
अस्मत लुटी माँ बहनो की सामने हमारे
ये भयानक मंजर देख
हम कैसे चुप रह लेते
लहू उबलता है आज भी
लूटे अभिमान पर
हाय रे उत्तराखंड मिला हमें
तू ऊंची कीमत ए आसमान पर
तुझको कोई संभाले फिर से
एक इंकलाब हो
लूट रहे है जो उत्तराखंड को
अब उनसे हिसाब हो
चलो मिलकर सभी आज एक सौंगंध खाते है
बैठे जो भ्रष्टाचारी उत्तराखंड के शीश पर
उन्हे धरती पर लाते हैं
तभी हम अपने शहीदों का मान बढ़ाएंगे
रिश्वतखोर कालाबाजारी और भ्रष्टाचार मुक्त
. होने का जब मिलकर संकल्प उठायेंगे
वीर शहीद.क्रांतिकारियों को तब श्रद्धांजलि चढ़ाएंगे
अपने शहीद वीरों का स्तुति गान गायेंगे
तभी हम उत्तराखंड के वीर
उत्तराखंडी कहलाएंगे
जय उत्तराखंड
अनीता चमोली
उत्तराखंड देहरादून



