इस प्रदर्शनी में पेंटिंग्स, मूर्तियाँ, इलस्ट्रेशन, फोटोग्राफ्स आदि शामिल हैं। प्रदर्शनी का शुभारंभ प्रो. बी. के. जोशी, डॉ. वंदना शिवा, पूर्व डीजीपी श्री आलोक लाल, सुश्री विभा पुरी दास तथा श्री एन. रविशंकर की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।

इस प्रदर्शनी के उपरांत कला केंद्र द्वारा पहली बार एक आर्ट रेजिडेंसी का आयोजन भी किया जा रहा है। यह भव्य वार्षिक कला प्रदर्शनी कला केंद्र के संस्थापक डॉ. द्विजेन सेन (स्नेह से ‘दादा’ कहे जाने वाले) की जयंती के अवसर पर उनके गौरवशाली योगदान को सम्मानित करने हेतु आयोजित की गई है। डॉ. द्विजेन सेन ने वर्ष 1949 में कला केंद्र की स्थापना की और देहरादून को कला जगत के मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनकी विरासत आज भी उनके शिष्यों और प्रशंसकों के माध्यम से जीवंत है।
लेफ्टिनेंट कर्नल वी. के. डुग्गल (सेवानिवृत्त), जो स्वयं ‘दादा’ के शिष्य रहे हैं, कला केंद्र के मुख्य संरक्षक (चीफ पैट्रन) के रूप में उनके गुरु की विरासत को दृढ़ता से आगे बढ़ा रहे हैं। उनके प्रयासों से कला केंद्र देहरादून की सजीव कला संस्कृति में निरंतर योगदान दे रहा है तथा ललित कला, संगीत और शिल्प के क्षेत्रों में प्रतिभाओं को संवार रहा है।
यह प्रदर्शनी 25 दिसंबर को उद्घाटित हुई है और 30 दिसंबर को समापन समारोह तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। सभी कला प्रेमियों और आमजन से प्रदर्शनी में पधारने का आग्रह है।
प्रदर्शनी में शामिल कलाकारों में शबनम आनंद, सतपाल गांधी, ज़ाकिर हुसैन, दीपशिखा सिंह, भूमेश भारती, आकांक्षा सोनकर, मोहम्मद मोइन, अंजलि थापा, नवीन कनवासी, हरि गुरुंग सहित अनेक कलाकार शामिल हैं।
यह प्रदर्शनी कला केंद्र तथा दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर (तीसरी मंज़िल) में 25 से 30 दिसंबर तक, प्रातः 11:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक देखी जा सकती है।



