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उत्तराखंड में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला विकासनगर क्षेत्र के हरिपुर मीनस मोटर मार्ग में बीती रात एक आयशर ट्रक कोटी गांव से पहले कोलिया खड्ड के पास अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। घटना की सूचना देर रात करीब 10:30 बजे स्थानीय लोगों ने कालसी थाना पुलिस को दी। मौके पर पुलिस और एसडीआरएफ की टीम तुरंत रवाना हुई और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। टीम ने घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जबकि मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, ट्रक दिल्ली से टमाटर बेचकर हिमाचल प्रदेश के नेरवा जा रहा था। हादसे के वक्त वाहन में तीन लोग सवार थे। मृतक की पहचान 28 वर्षीय इसराइल निवासी नेरवा, शिमला (हिमाचल प्रदेश) के रूप में हुई है। जबकि घायल हुए दो व्यक्तियों में 32 वर्षीय असलम और 45 वर्षीय गुलाम, दोनों निवासी नेरवा, शिमला (हिमाचल प्रदेश) हैं। फिलहाल पुलिस घटना की जांच में जुटी है और हादसे के कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। स्थानीय लोग पहाड़ी सड़कों की खस्ताहालत और सुरक्षा उपायों की कमी को लेकर प्रशासन से नाराजगी जता रहे हैं।
उपाध्यक्ष मसूरी देहरादून विकास प्राधिरकण द्वारा आढत बाजार पूर्नविकास परियोजना के क्रियान्यवयन के सम्बन्ध में बैठक
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि जमरानी बांध बहुद्देशीय परियोजना और सौंग बांध पेयजल परियोजना के कार्यों में और तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के तहत होने वाले कार्यों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए। जमरानी बांध परियोजना के कार्यों को पूर्ण करने का लक्ष्य जून 2029 तक रखा गया है, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इसे दिसम्बर 2028 तक पूर्ण करने के निर्देश दिये हैं। सौंग बांध परियोजना को भी निर्धारित अवधि मार्च 2030 से पहले पूर्ण करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं।
जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना:
लगभग रू. 3808 करोड़ लागत की इस योजना के तहत 150.6 मी. ऊंचे बांध का निर्माण, 42.92 किमी लम्बी नहर का पुनर्निर्माण एवं 21.25 किमी लंबी नई नहर का निर्माण कार्य किया जाना है। इस परियोजना के तहत हल्द्वानी शहर एवं उसके समीपवर्ती क्षेत्रों की भविष्य की लगभग 10.50 लाख आबादी के लिए 117 एम.एल.डी. पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी। इस परियोजना में बनने वाली 09 किमी. लम्बी झील से एक नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित होगा तथा लगभग 57 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचन क्षमता का सृजन होगा।
सौंग बांध पेयजल परियोजना:
लगभग रू. 2492 करोड़ लागत की इस योजना के तहत 130.60 मी. ऊंचे बांध का निर्माण एवं 1.5 मी. व्यास की 14.70 किमी. लम्बी जल वहन प्रणाली का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा 85 किमी. जल वितरण प्रणाली एवं 150 एम.एल.डी. जल शोधन संयंत्र का निर्माण भी इस परियोजना के तहत किया जाना है। इससे भविष्य में देहरादून शहर एवं उपनगरीय क्षेत्रों की वर्ष 2053 तक अनुमानित लगभग 10.65 लाख की जनसंख्या के लिए 150 एम.एल.डी. ग्रेविटी से पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की जाएगी। इस बांध निर्माण से बनने वाली 3.5 किमी. लम्बी झील को एक नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जायेगा।
बैठक में प्रमुख सचिव श्री आर.के.सुधांशु, सचिव श्री एस.एन.पाण्डेय, श्री युगल किशोर पंत, अपर पुलिस महानिदेशक श्री ए.पी. अंशुमन एवं अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी मौजूद थे।
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दून घाटी अधिसूचना 1989 निष्क्रिय करने के विरोध में नैनीताल हाईकोर्ट में कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव थापर की जनहित याचिका पर कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को निर्देश !
दून घाटी के 15 लाख निवासियों और पर्यावरण को बचाने हेतु कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव थापर की जनहित याचिका पर मा० हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार जवाब तलब !
आज माननीय हाईकोर्ट नैनीताल में उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर ने दून घाटी की अधिसूचना 1989 को केंद्र सरकार द्वारा निष्क्रिय करनें हेतु जो पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा शासनादेश दि. 13 मई 2025 के विरोध में और दून घाटी को बचाने हेतु जनहित याचिका की सुनवाई हुई और माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका में सख्त कार्यवाही करी और केंद्र सरकार को निर्देशित किया।
जैसा की विदित है की दून घाटी अधिसूचना 1989 में 01 फरवरी 1989 को दून घाटी क्षेत्र को पर्यावरण के विषय पर संवेदनशील होने के कारण lime stone माइनिंग और Air Quality Index (AQI) के सुधार हेतु सुप्रीम कोर्ट के 30 अगस्त 1988 के निर्देशानुसार दून घाटी अधिसूचना का प्रावधान किया गया था। जिससे देहरादून और उसके आसपास के क्षेत्र मसूरी, सहसपुर, डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर, और इनके आस पास के इलाकों के पर्यावरण को बचाने के लिए किया गया है।
किंतु राज्य सरकार के 4 जुलाई 2023 के प्रस्ताव पर पर्यावरण वन व जल वायु मंत्रालय ( MoEF) द्वारा 21.12.2023 को दून घाटी अधिसूचना 1989 निष्क्रिय करने हेतु शासनादेश का प्रारूप और 13 मई 2025 को अंततः शासनादेश जारी किया गया जिस पर राज्य सरकार को दून घाटी में प्रतिबंधित भारी औद्योगिक गतिविधि को संचालित करने का अधिकार भी दिया गया जैसे स्लॉटर हाउस, क्रशर माइनिंग और अन्य RED Category की औद्योगिक गतिविधि हेतु। उल्लेखनीय है की राज्य की डबल इंजन सरकार ने पुनः प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी के निर्देश “NCAP से उल्टा” यह कार्य दून घाटी अधिसूचना हटाने का काम किया है क्योंकि भारत सरकार द्वारा 2019 में National Clean Air Program ( NCAP) शुरू किया गया जिसमे भारत के 131 उन शहरों को चयनित किया गया जिनकी आबो–हवा में AQI प्रदूषण की मात्रा अधिक थी और उनके सुधार हेतु अबतक भारत सरकार ने 12,286 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया गया है।
उल्लेखनीय है की NCAP में उत्तराखंड के 3 शहर देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर को शामिल किया गया और AQI पर्यावरण सुधार हेतु 2021 में लगभग 68 करोड़ रुपए का बजट भी भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार को जारी किया और देहरादून और ऋषिकेश दोनो ही पूर्णत: दून घाटी क्षेत्र के अंतर्गत आते है और इसके उलट राज्य सरकार यहां दून घाटी अधिसूचना हटाने का कार्य कर रही है। भारत सरकार के विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार “देहरादून का प्रदूषण स्तर देश के 10 सबसे बुरे शहरों” में आता है जिसकी PM10 की मात्रा “Permissible limit से तीन गुना” अधिक है।
उल्लेखनीय है की उत्तराखंड सरकार ने दून घाटी अधिसूचना 1989 को हटाने का जो प्रावधान किया है उसके विरोध में याचिकाकर्ता अभिनव थापर ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी को 8 फरवरी 2024 व 04 मार्च 2025 को प्रत्यावेदन दिए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश दि० 30.08.1988, दून वैली एक्ट दि० 01.02.1989 व NCAP प्रोग्राम भारत सरकार की रिपोर्ट 6 फरवरी 2024 का उल्लेख करते हुए प्रधान मंत्री कार्यालय का दून घाटी को बचाने के लिए ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 1988 के आदेश व केंद्र सरकार के NCAP प्रोग्राम को अनदेखा करते हुए अधिसूचना दून घाटी को हटाने का निर्णय लिया है जिससे देहरादून और आस पास के क्षेत्र में भारी पर्यावरण नुकसान व प्रदूषण की मात्रा बहुत बढ़ जाएगी। इस पत्र के क्रम में प्रधान मंत्री कार्यालय हस्ताक्षेप के बाद MoEF ने वन विभाग उत्तराखंड को इस विषय में रिपोर्ट जारी करने के लिए 13 फरवरी 2024 व 21 मार्च 2025 को पत्र लिखा और यह विषय 18 महीनों तक जैसे-तैसे लंबित रहा किंतु अब 13 मई 2025 को राज्य सरकार ने दून घाटी में Industrial Categorisation समाप्त कर दिया जिससे दून घाटी अधिनियम 1989 बहुत शिथिल और कमजोर हो गया है ।
याचिकाकर्ता अभिनव थापर ने कहा की हम देहरादून, मसूरी, सहसपुर, डोईवाला, ऋषिकेश , विकासनगर और आसपास का क्षेत्र जो दून घाटी क्षेत्र के अंतर्ग्रत आता है, उसको बचाने की लड़ाई में मा० हाईकोर्ट ने आज बड़ा कदम लिया है और केंद्र सरकार को निर्देशित किया है। प्रधान मंत्री कार्यालय के हस्ताक्षेप के बाद भी यदि उत्तराखंड सरकार जाग नही रही है तो ये राज्य सरकार का दुर्भाग्यपूर्ण रवैया है, उत्तराखंड में पहले ही रैणी, जोशीमठ, उत्तरकाशी और टिहरी बांध के आसपास व अन्य कई इलाकों में कई बार आपदा आ चुकी है और Seismic Zone 4 और Fault Lines से लैस दून घाटी में पहले से ही अत्यधिक जनसंख्या का दबाव है जिससे आए दिन पर्यावरण में बदलाव हो रहा है। राज्य सरकार ने भारत सरकार को जो गुमराह करने के लिये तथ्य दिए है उसमें दून घाटी में वंचित Slaughter House, Red Zone Category की उद्योग के स्थापना हेतु प्रस्ताव दीया है जोकि सुप्रीम कोर्ट के 30 अगस्त 1988, दून घाटी 01 फरवरी 1989 व NCAP 2019 के मूल अवधारणा के विरुद्ध है। इस दून घाटी में उत्तराखंड की 15 लाख से अधिक की जनता निवास करती है जिनके जान को जोखिम में डालकर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को गुमराह कर दून घाटी को निष्क्रिय करने का निर्णय लिया है, जिसके खिलाफ हमारा संघर्ष जारी रहेगा ।
जनहित याचिका के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने बताया कि मा० हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र व न्यायाधीश आलोक माहरा युक्त पीठ ने इस याचिका के दून घाटी अधिनियम 1989 को निष्क्रिय करने में याचिकाकर्ता के तथ्यों के अनुरूप केंद्र सरकार को निर्देश दिये कि दून घाटी के विषय में मा० सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के क्रम में ही केंद्र सरकार अग्रेतर कार्यवाही करे। माननीय हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देशित किया कि वह तथ्यों सहित पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार को दून घाटी के 13 मई 2025 के शासनादेश के संबंध में वार्ता करें और दून घाटी में हुए नुकसान व मौजूदा तथ्यों से केंद्र सरकार को अवगत कराए। 27 जून 2025 को पुनः सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई है।
गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने वीसी के माध्यम से प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा जनपद में सीएम हेल्पलाइन के प्रभावी क्रियान्वयन और जनसमस्याओं का निस्तारण समय किये जाने से संबंधित जानकारी ली गयी ।
हल्द्वानी में बुधवार को हुए एक दर्दनाक हादसे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। घटना में चार लोगों की मृत्यु हो गई जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्माओं के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि वे मृतकों को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह घटना अत्यंत दुःखद है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। यह हादसा तब हुआ जब एक XUV वाहन, जिसमें सात लोग सवार थे, हल्द्वानी से किच्छा की ओर जाते समय फायर स्टेशन के पास अनियंत्रित होकर नहर में गिर गया। मृतकों में दो महिलाएं, एक पुरुष और एक नवजात शामिल हैं, जबकि घायल तीन लोगों का उपचार सुशीला तिवारी अस्पताल में चल रहा है।
उत्तराखण्ड राज्य की संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिये राज्य में बारहमासी पर्यटन को बढ़ावा देने, राज्य को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिये उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद द्वारा “कंटेंट क्रिएटर्स प्रतियोगिता 2025” का आयोजन किया गया। यह आयोजन 23 मार्च, 2025 से 23 मई, 2025 तक आयोजित किया गया था।
इस संबंध में उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसी वर्ष 06 मार्च 2025 को उत्तराखण्ड में शीतकालीन प्रवास के दौरान कंटेंट क्रिएशन पर जोर देने का आह्वान किया गया था। सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में राज्य की संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु राज्य में बारहमासी पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को आमंत्रित करते हुए “कंटेंट क्रिएटर्स प्रतियोगिता 2025” आयोजित की गई।
बंसीधर तिवारी जी ने बताया कि इस प्रतियोगिता को लेकर कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा काफी उत्साह दिखाया गया। प्रतियोगिता में कुल 110 प्रविष्टिया प्राप्त हुई जिनमें 56 रील्स की और 54 शार्ट फिल्म की श्रेणी में हैं। प्रतियोगिता में प्राप्त होने वाले आवेदनों का परीक्षण एवं विजेता प्रतिभागियों के चयन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी/महानिदेशक सूचना की अध्यक्षता में निर्णायक मण्डल समिति का गठन किया गया है। .समिति में एफ.टी.आई. एवं पर्यटन विभाग से विषय विशेषज्ञों को सदस्य के रूप में नामित किया गया है। इस समिति की बैठक 26 जून, 2025 को आहूत की गई है।
उत्तराखंड के हित में अनेक नीतिगत प्रावधानों में शिथिलता देने का किया आग्रह
सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क व संचार सुविधाओं के विस्तार किया जाना जरूरी: मुख्यमंत्री
राज्य में उच्च स्तरीय ग्लेशियर अध्ययन केंद्र, जैव विविधता संरक्षण संस्थान तथा अंतर्राष्ट्रीय साहसिक खेल प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए भी केंद्र से सहयोग मांगा
नंदा राजजात यात्रा और कुम्भ मेला के भव्य आयोजन हेतु केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को वाराणसी में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 25वीं बैठक में प्रतिभाग किया। बैठक में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं मंत्रीगण उपस्थित थे।
मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से लगा उत्तराखण्ड राज्य सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके दृष्टिगत राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, संचार, सुरक्षा एवं रसद आपूर्ति की समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने केन्द्रीय गृह मंत्री से आग्रह किया कि सीमा सड़क संगठन के माध्यम से उत्तराखण्ड को और अधिक सहायता प्रदान की जाए। वाईब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के सीमावर्ती गाँवों में सुविधाओं का विकास किया जाए जिससे वहां हो रहे पलायन को रोकने में सहायता मिल सके। उन्होंने सीमांत क्षेत्रों में संचार सुविधाओं के विकास के लिए भारत नेट योजना, 4-जी विस्तार परियोजना तथा उपग्रह आधारित संचार सेवाएं प्रारंभ करने का भी अनुरोध किया।
