न फंस धर्म के दिखावे मे
यहाँ जाल लिये बैठे हर राह मे
धर्म के ठेकेदार है
उलझा लिया तुमने खुद को
इनके अंधविश्वास मे
फलेगा फूलेगा इनका फिर ये
अंधा व्यापार है
लूट लेगे तुम्हे धर्म के नाम पर
शिकार करेगे
तेरा यहां ढोंगी
बाबा हजार. है
नोंच लेंगे तेरी पवित्र देह को
कहकर हम ईश्वर के अवतार है
ये विशाल सागर है अधर्म का
जहां धर्म का होता सिर्फ व्यापार है
“अनीता चमोली”
देहरादून( उत्तराखंड )



