देहरादून।
राजपुर की शांत और सुरम्य वादियों में स्थित जगत जननी माँ अंबिका देवी का प्राचीन सिद्धपीठ मंदिर एक बार फिर नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से सराबोर होने जा रहा है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मंदिर परिसर में भव्य धार्मिक आयोजनों की तैयारी पूरी कर ली गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह का वातावरण बना हुआ है। ✨🙏🏻

मंदिर का संचालन श्री गुरु राम राय जी महाराज, श्री झंडा साहिब दरबार द्वारा किया जाता है। मेला अधिकारी श्री विजय गुलाटी ने जानकारी देते हुए बताया कि 26 मार्च (गुरुवार) को सुप्रसिद्ध लोक गायक मंगलेश डंगवाल द्वारा माँ अंबिका का भव्य जागरण आयोजित किया जाएगा, जिसमें दूर-दराज से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसके अगले दिन 27 मार्च (शुक्रवार) को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।
📜 150 वर्षों से आस्था का केंद्र
यह सिद्धपीठ लगभग 150 वर्ष पुराना बताया जाता है। मान्यता है कि श्री गुरु राम राय दरबार साहिब के आठवें ब्रह्मलीन श्रीमहंत लक्ष्मणदास जी महाराज, जो माँ अंबिका के परम उपासक थे, ने इसी पावन स्थल पर कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट श्रद्धा से प्रसन्न होकर माँ अंबिका ने उन्हें दिव्य दर्शन दिए। इसी दिव्य अनुभूति के बाद इस पवित्र स्थान पर मंदिर की स्थापना हुई, जो आज एक सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध है।
🌿 प्रकृति और आध्यात्म का अद्भुत संगम
देहरादून के पुराने राजपुर, कैरवान गांव में स्थित यह मंदिर शहर की भीड़-भाड़ से दूर एक शांत और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करता है। चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ी वादियाँ और सुकून भरा माहौल श्रद्धालुओं को ध्यान और आत्मिक शांति का अनुभव कराता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, माँ अंबिका ने स्वयं कच्चे आम के पेड़ की छाया में मंदिर स्थापित करने का संकेत दिया था, जिससे इस स्थान का नाम “अंबिका” पड़ा।
🏛️ वास्तुकला और नया स्वरूप
मंदिर की वास्तुकला में औपनिवेशिक शैली की झलक देखने को मिलती है, जिसमें घोड़े की नाल के आकार के मेहराब इसकी विशेष पहचान हैं।
समय के साथ, वर्तमान में श्रीमहंत देवेंद्रदास जी महाराज के दिशा-निर्देशों में इस सिद्धपीठ को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया है। यह प्रयास न केवल मंदिर की सुंदरता को बढ़ाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इसके ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व से भी जोड़ता है।
🙏 नवरात्रि पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की आस्था
हर वर्ष नवरात्रि, विशेषकर राम नवमी के अवसर पर इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं और पूरा वातावरण भक्ति, भजन और जयकारों से गूंज उठता है।
✨ यह सिद्धपीठ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि
आस्था, तपस्या और दिव्यता का जीवंत प्रतीक है—जहाँ हर आने वाला भक्त शांति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है। 🙏🏻



