कोर्ट ने 16 साल की मुस्लिम लड़की की शादी को मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत सही ठहराया है. यह फ़ैसला जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस महादेवन की खंडपीठ ने सुनाया. खंडपीठ ने शादी पर सवाल उठाने वाले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को फटकार भी लगाई है, आयोग ने लड़की की उम्र का हवाला देते हुए शादी पर सवाल उठाया था और इसे पॉस्को अधिनियम (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) का उल्लंघन बताया था. इस फ़ैसले के बाद बाल विवाह कानून बनाम पर्सनल लॉ की बहस और तेज़ हो गई है. भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत लड़की की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल है.





