उत्तरायणी कौथिक महोत्सव–2026 के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए काश्तकारों, शिल्पकारों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉल इस वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इस महोत्सव ने न केवल उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवंत किया, बल्कि स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और व्यापक बाजार भी उपलब्ध कराया।
इस अवसर पर गीता धामी ने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति, काश्तकारों और कारीगर भाई-बहनों को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते देख गर्व की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि उत्तरायणी कौथिक जैसे आयोजन स्थानीय प्रतिभाओं और उत्पादों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों से आए काश्तकारों ने अपने जैविक उत्पाद, पारंपरिक अनाज एवं स्थानीय व्यंजन प्रदर्शित किए, वहीं शिल्पकारों ने हस्तशिल्प और लोक कलाओं के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि संगठित प्रयासों से महिलाओं और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।
गीता धामी ने विशेष रूप से मातृशक्ति की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि महिलाएं आज आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। ऐसे आयोजन “वोकल फॉर लोकल” की भावना को साकार करते हुए स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।
Sewa Sankalp Foundation द्वारा आयोजित इस महोत्सव के माध्यम से काश्तकारों, शिल्पकारों एवं स्वयं सहायता समूहों को निरंतर मंच प्रदान किया जा रहा है। संस्था भविष्य में भी ऐसे प्रयासों को जारी रखेगी, ताकि प्रदेश की स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिल सकें और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को मजबूती मिले।



