दिल्ली, 24 मार्च 2026: यूपीईएस देहरादून, एक अग्रणी बहुविषयक और शोध–केंद्रितविश्वविद्यालय, ने आज घोषणा की कि ओपनएआई के सहयोग से वह अब एक‘एआई–फर्स्ट’ विश्वविद्यालय बन गया है। संस्थान अब ऐसा एआई ढाँचा उपलब्धकराएगा जो सुव्यवस्थित, सबके लिए समान रूप से सुलभ और परिणामों के आधार परमापा जा सके, ताकि शिक्षण, सीखने, शोध और छात्र अनुभव में बेहतर नतीजे हासिलकिए जा सकें। यूपीईएस अपने कैंपस में चैटजीपीटी एजु लागू करेगा, जिससे जेनरेटिवएआई को संस्थान की मुख्य व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा और सभी छात्रों, शिक्षकों व स्टाफ सदस्यों को इसका निःशुल्क उपयोग मिल सकेगा।
चैटजीपीटी एजु, ओपनएआई की शिक्षा के लिए बनाई गई योजना है, जिसेज़िम्मेदारी से पूरे विश्वविद्यालय स्तर पर लागू करने के लिए तैयार किया गया है।इसमें संस्थागत एडमिन नियंत्रण और एंटरप्राइज़–ग्रेड सुरक्षा उपलब्ध है। यूपीईएस मेंइसका उपयोग इस बात को बदलेगा कि सीखने की पूरी व्यवस्था में एआई को किसतरह शामिल किया जाता है। यह उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक नई और मजबूतदिशा तय करेगा, क्योंकि इससे छात्र अपनी रोज़मर्रा की पढ़ाई के दौरान व्यावहारिकऔर विषय–विशेष एआई क्षमता विकसित कर सकेंगे, जिससे उन्हें प्लेसमेंट और नएदौर की नौकरी के अवसरों में बढ़त मिलेगी।
यह सहयोग यूपीईएस में छात्रों और शिक्षकों के लिए कई ठोस और उपयोगी अनुभवलेकर आएगा:
• हर छात्र के लिए फ्लैगशिप एआई ट्यूटर – जो प्रोग्राम और सेमेस्टर के अनुसारसिलेबस तथा लर्निंग आउटकम्स पर आधारित सहायता देगा। इसमें विषयों को समझनेमें मदद, अभ्यास में सहयोग और बहुभाषी सहायता शामिल होगी।
• ऐसे सीखने के तरीके जो असेसमेंट की विश्वसनीयता बनाए रखें – ताकि एआई केउपयोग के बाद भी छात्र अपनी वास्तविक समझ दिखा सकें और शैक्षणिक ईमानदारीबनी रहे।
• स्टूडेंट सर्विसेज मॉड्यूल – जो छात्रों को नीतियों की जानकारी देगा, उन्हें चरणबद्धमार्गदर्शन प्रदान करेगा और महत्वपूर्ण मामलों को तय प्रक्रिया के अनुसार मानवीयसहायता तक पहुँचाएगा।
• रिस्पॉन्सिबल एआई चार्टर – जो एआई के सही उपयोग, गोपनीयता और डेटा हैंडलिंगके लिए स्पष्ट दिशा–निर्देश तय करेगा, ताकि पूरे विश्वविद्यालय में भरोसा, जवाबदेहीऔर एकरूपता बनी रहे।
• छात्रों और शिक्षकों के लिए डीप रिसर्च मॉडल्स तक पहुँच – जिससे गहन अध्ययन, बेहतर शैक्षणिक और ज्ञानपरक परिणाम, तथा एडवांस्ड क्रेडिट्स के साथ गहरे शोध कीसंभावनाएँ बढ़ेंगी।
इस रणनीतिक सहयोग पर अपने विचार साझा करते हुए, डॉ. सुनील राय, वाइसचांसलर, यूपीईएस, ने कहा,
“हमें खुशी है कि हम भारत के उन अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल हैं जो इस स्तरपर एक सुव्यवस्थित, पूरे कैंपस में लागू होने वाली जेनएआई व्यवस्था के लिएप्रतिबद्ध हैं—जहाँ एआई को कुछ अलग–अलग प्रयोगों की तरह नहीं, बल्कि शिक्षाऔर सेवाओं की मुख्य संरचना के रूप में देखा जा रहा है। हम एक ऐसे एआई–फर्स्टविश्वविद्यालय का निर्माण कर रहे हैं जहाँ एआई सीखने, पढ़ाने, शोध और छात्रजीवन के हर हिस्से में स्वाभाविक रूप से जुड़ा होगा। एआई साक्षरता पहले दिन से हरछात्र, हर शिक्षक और कैंपस की हर प्रक्रिया की बुनियादी नींव होगी।”
राघव गुप्ता, हेड ऑफ एजुकेशन – इंडिया एंड एशिया–पैसिफिक, ओपनएआई, नेकहा, “भारत में चैटजीपीटी का उपयोग करने वाले छात्रों का समुदाय पहले ही दुनियामें सबसे बड़ा है। जैसे–जैसे एआई टूल्स का उपयोग और गहराई से होगा, वे रोज़मर्राकी पढ़ाई का हिस्सा बन जाएंगे। यूपीईएस की यह पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्णकदम है और यह एआई को शैक्षणिक अनुभव का एक मुख्य हिस्सा बनाएगी, जिससेएआई–प्रधान दुनिया में नौकरी के लिए तैयारी बेहतर होगी।”
छात्रों के लिए सीखना अधिक व्यक्तिगत और आसान होगा, जिसमें उन्हें रियल–टाइमसहायता, अनुवाद और फीडबैक मिलेगा। वे पहले दिन से ही एआई का व्यावहारिक ज्ञानविकसित करेंगे। इसके साथ ही, उन्हें अपने–अपने विषयों में एआई का उपयोग करना भीसिखाया जाएगा, ताकि वे अधिक मजबूत, नौकरी के लिए तैयार क्षमता और बेहतररोज़गार संभावनाओं के साथ स्नातक बनकर निकलें। शिक्षकों के लिए एआई रोज़मर्राके कई कामों का बोझ कम करेगा, जिससे वे मार्गदर्शन, चर्चा और गहरे शिक्षण परअधिक समय दे सकेंगे। शोधकर्ताओं के लिए एआई साहित्य को जल्दी समझने, जानकारी को व्यवस्थित करने और विश्लेषण में सहायता करेगा, जिससे शोध दलविचारों से विश्वसनीय परिणामों तक तेज़ी से पहुँच सकेंगे, जबकि गुणवत्ता, ईमानदारीऔर मानवीय निर्णय को केंद्र में रखा जाएगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यूपीईएस केवल भविष्य की तकनीकों को अपना नहीं रहा, बल्कि भारतीय शिक्षा में एक नया मानक भी स्थापित कर रहा है। अधिक जानकारीके लिए कृपया देखें: www.upes.ac.in
यूपीईएस के बारे में:
उत्तराखंड राज्य विधानमंडल के यूपीईएस एक्ट, 2003 के तहत स्थापित, यूपीईएस एकउच्च रैंकिंग वाला, यूजीसी–मान्यता प्राप्त निजी विश्वविद्यालय है। नेशनल इंस्टीट्यूशनलरैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) 2025, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार, यूपीईएस को विश्वविद्यालयों में 45वाँ स्थान मिला है। वहीं, लॉ में 18वाँ, मैनेजमेंट में36वाँ और इंजीनियरिंग में 43वाँ स्थान प्राप्त हुआ है।
टाइम्स हायर एजुकेशन (टीएचई) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 के अनुसार, यूपीईएसअब वैश्विक स्तर पर 501-600 बैंड में और भारत में 5वें स्थान पर है, जो 2025 में 7वेंस्थान से बेहतर है। विशेष रूप से, रिसर्च क्वालिटी में यूपीईएस ने सिर्फ एक वर्ष में 57 स्थानों की छलांग लगाकर वैश्विक स्तर पर 299वाँ स्थान हासिल किया है। इसकेअलावा, क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 के अनुसार, यूपीईएस को भारत मेंअकादमिक प्रतिष्ठा के आधार पर नंबर 1 निजी विश्वविद्यालय का स्थान मिला है। यहदुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत विश्वविद्यालयों में शामिल है।
यूपीईएस को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित क्यूएस रेटिंग द्वारा एम्प्लॉयबिलिटी(प्लेसमेंट्स) में 5 स्टार मिले हैं। विश्वविद्यालय ने पिछले पाँच वर्षों में 100 प्रतिशतप्लेसमेंट्स दर्ज किए हैं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की सूची के अनुसार, यूपीईएस के 50 सेअधिक फैकल्टी सदस्य दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत शोधकर्ताओं में शामिल हैं।
यूपीईएस अपनी सात स्कूलों के माध्यम से स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रम प्रदानकरता है: स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस, स्कूल ऑफडिज़ाइन, स्कूल ऑफ लॉ, स्कूल ऑफ बिज़नेस, स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ एंडटेक्नोलॉजी, और स्कूल ऑफ लिबरल स्टडीज़ एंड ह्यूमैनिटीज़।
यूपीईएस परिवार में 19,100 से अधिक छात्र, 1,500 से अधिक फैकल्टी और स्टाफसदस्य, और 40,000 से अधिक पूर्व छात्र शामिल हैं, जो ईवाई, केपीएमजी, बेन एंडकंपनी, मैकिन्से एंड कंपनी, कैपजेमिनी, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ओरेकल, नेस्ले, आईटीसी, अदाणी पावर, ओएनजीसी, जीएमआर, टीसीएस, विप्रो, इन्फोसिस, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, एक्सेंचर, डेलॉइट और अन्य प्रमुख संस्थानों में कार्यरत हैं।



