उत्तराखंड के राज्यपाल की प्रेरणा से लिखी गई पुस्तक ‘नशा मुक्त नव निर्माण’ को गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का आशीर्वाद
देहरादून। युवाओं को नशे की बढ़ती चुनौती से बचाने और समाज में जागरूकता का व्यापक अभियान चलाने के उद्देश्य से शिक्षाविद्, लेखक एवं युवा सशक्तिकरण के समर्थक डॉ. रोहित रस्तोगी द्वारा लिखित पुस्तक ‘नशा मुक्त नव निर्माण’ को विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु एवं द आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं प्राप्त हुई हैं। यह आशीर्वाद पुस्तक को बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में प्राप्त हुआ, जहां गुरुदेव ने पुस्तक के सामाजिक उद्देश्य की सराहना करते हुए इसे युवा जागरूकता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
डॉ. रोहित रस्तोगी वर्तमान में डीबीएस ग्लोबल यूनिवर्सिटी, देहरादून में रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत हैं। वे पिछले दो दशकों से शिक्षा, कौशल विकास, युवा सशक्तिकरण एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी यह प्रथम पुस्तक युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए उन्हें आत्म-जागरूक, जिम्मेदार और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित नागरिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह पुस्तक केवल नशे के दुष्प्रभावों पर आधारित एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि युवा चेतना को जागृत करने और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करने वाला एक सामाजिक आंदोलन है।
इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसके लेखन की प्रेरणा उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल से प्राप्त हुई। राज्यपाल महोदय ने पुस्तक के लिए अपना प्रेरणादायक संदेश भी प्रदान किया है। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ने भी युवाओं के लिए अपने संदेश साझा किए हैं, जिससे यह पुस्तक समाज, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक सामूहिक संकल्प का प्रतीक बन गई है।
पुस्तक के लेखक डॉ. रोहित रस्तोगी का मानना है कि नशा केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की आत्मा, विचारों, सपनों और जीवन के उद्देश्य को भी प्रभावित करता है। इसी सोच के साथ उन्होंने इस पुस्तक के माध्यम से युवाओं को यह महसूस कराने का प्रयास किया है कि नशे की गिरफ्त में आने वाला व्यक्ति और उसका परिवार किन मानसिक, सामाजिक एवं भावनात्मक परिस्थितियों से गुजरता है। पुस्तक का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर आत्म-जागरूकता और आत्म-सुरक्षा की भावना विकसित करना है।
‘नशा मुक्त नव निर्माण’ में वास्तविक जीवन से प्रेरित अनेक कहानियों, अनुभवों और प्रेरक प्रसंगों को शामिल किया गया है। ये कहानियां पाठकों को यह समझने में सहायता करती हैं कि नशे की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा, साथियों के दबाव या गलत संगति से होती है, लेकिन इसके परिणाम जीवनभर के संघर्ष में बदल सकते हैं। साथ ही पुस्तक यह भी बताती है कि सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग, शिक्षा और आत्मविश्वास के माध्यम से नशे की लत से बाहर निकलना संभव है।
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने पुस्तक के उद्देश्य की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और जीवन मूल्यों से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनका मानना है कि जागरूक, स्वस्थ और नशामुक्त युवा ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव रख सकते हैं।
पुस्तक विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, परामर्शदाताओं तथा समाज के सभी वर्गों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका के रूप में सामने आई है। यह युवाओं को केवल नशे से दूर रहने की सीख नहीं देती, बल्कि उन्हें जीवन के उद्देश्य, आत्मसम्मान, मानसिक स्वास्थ्य और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को समझने के लिए भी प्रेरित करती है।
‘नशा मुक्त नव निर्माण’ का मूल संदेश स्पष्ट है – “नशे से मुक्ति केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के नव निर्माण का मार्ग है।” यह पुस्तक एक ऐसे भारत की कल्पना प्रस्तुत करती है जहां युवा जागरूक हों, आत्मविश्वासी हों और अपने सपनों के साथ-साथ राष्ट्र के भविष्य को भी सशक्त बनाने में योगदान दें।



