पहाड़ों की वादियों में फिर से रौनक लानी है,
सूनी पड़ी चौखटों पर खुशियों की ज्योत जलानी है।
खेतों में फिर हरियाली हो, बागों में फल मुस्काएं,
मेहनत से अपने गांवों के सपने फिर से सजाएं।
नदियों का निर्मल पानी, जंगल की ठंडी छांव,
यही हमारी पहचान है, यही हमारा गांव।
रोजगार के नए अवसर हर घर तक पहुंचाने हैं,
छोड़ गए जो अपनों को, उन्हें वापस बुलाने हैं।
आओ मिलकर संकल्प करें, विकास की नई कहानी लिखें,
अपने पहाड़, अपनी मिट्टी के लिए फिर से नई रवानी लिखें।
न रुकेगा, न झुकेगा ये उत्तराखंड हमारा,
उद्यानों की खुशबू से महकेगा हर गांव हमारा। 🌿✨
— पहाड़ की खबर ✍️🏔️



