नई दिल्ली। महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में बड़ा झटका लगा है। सदन में हुए मत विभाजन में यह बिल आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और विचार स्तर पर ही गिर गया।
कुल 528 सांसदों ने मतदान में हिस्सा लिया, जिसमें 298 वोट बिल के पक्ष में और 230 विरोध में पड़े। जबकि इसे पारित कराने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी। इस तरह सरकार 54 वोट से पीछे रह गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने परिणाम घोषित करते हुए कहा कि आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण विधेयक आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
12 साल में पहली बार अहम विधेयक पर सरकार असफल
यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले एक दशक से अधिक समय में यह पहला मौका है जब केंद्र की भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार संसद में कोई बड़ा विधेयक पारित कराने में विफल रही है।
सदन में करीब 21 घंटे चली बहस में 130 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिनमें 56 महिला सांसद भी शामिल थीं। सरकार ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसके प्रावधानों और समयसीमा पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी का हमला—“संविधान पर हमला”
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह केवल महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विधेयक के जरिए राजनीतिक ढांचे में बदलाव करना चाहती है। विपक्षी दलों ने इस परिणाम को लोकतंत्र की जीत बताया।
सत्ता पक्ष का पलटवार, अमित शाह ने बताया ‘नारी शक्ति का अपमान’
वहीं सरकार की ओर से अमित शाह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि सदन में “अजीब नजारा” देखने को मिला, जहां विपक्ष ने एकजुट होकर बिल को पास नहीं होने दिया।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के गिरने से महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा।
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने भी विपक्ष पर महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
परिसीमन बना विवाद की जड़
विपक्ष ने साफ किया कि उसका विरोध महिला आरक्षण से नहीं, बल्कि उससे जुड़े परिसीमन प्रावधानों से है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि यह बिल महिलाओं के नाम पर सत्ता में बने रहने की रणनीति था।
उनका आरोप था कि सरकार परिसीमन के जरिए राजनीतिक समीकरण बदलना चाहती थी, जिससे कुछ राज्यों और वर्गों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।
आधी रात का नोटिफिकेशन भी बना विवाद
मतदान से पहले सरकार द्वारा जारी आधी रात के नोटिफिकेशन को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कहा कि बिल पास होने से पहले ही प्रशासनिक कदम उठाना संसदीय परंपराओं के विपरीत है।
आगे क्या?
महिला आरक्षण बिल का गिरना केवल एक विधायी असफलता नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।
सरकार के लिए यह बड़ा झटका
विपक्ष के लिए मनोबल बढ़ाने वाला परिणाम
आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बनने की संभावना
अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इसे नए रूप में दोबारा पेश करती है या नहीं, और क्या इस बार व्यापक सहमति बन पाती है।



