देहरादून। सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों पर लगाए जा रहे अव्यावहारिक संपत्ति कर, दोहरे कराधान (डबल टैक्सेशन) और ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता के विरोध में फूड इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (FIAU) के नेतृत्व में उद्योगपतियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नगर पंचायत सेलाकुई के अधिशासी अधिकारी (ईओ) श्री पाठक से उनके कार्यालय में मुलाकात कर उद्योगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। वार्ता के बाद अधिशासी अधिकारी ने फिलहाल चार माह के लिए टैक्स वसूली और नोटिस संबंधी कार्रवाई स्थगित करने का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान उद्योगपतियों ने कहा कि सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों पर अव्यावहारिक संपत्ति मूल्यांकन के आधार पर भारी-भरकम कर लगाया जा रहा है। इसके साथ ही सिडकुल और सारा इंडस्ट्रियल एस्टेट की औद्योगिक इकाइयों पर दोहरे कराधान का बोझ डाला जा रहा है, जो उद्योगों के हितों के विपरीत है। प्रतिनिधिमंडल ने इस व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने नगर पंचायत द्वारा उद्योगों से ट्रेड लाइसेंस (व्यावसायिक लाइसेंस) लेने की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि उद्योगों को ट्रेड लाइसेंस जारी करने का वैधानिक अधिकार नगर पंचायत के पास नहीं है, ऐसे में इस आधार पर उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।
FIAU के प्रतिनिधियों ने अधिशासी अधिकारी से कहा कि एक ओर उत्तराखंड सरकार निवेश सम्मेलन आयोजित कर राज्य में नए उद्योगों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर उद्योगों को भारी-भरकम टैक्स नोटिस भेजे जा रहे हैं। इससे निवेशकों के बीच राज्य की औद्योगिक नीति को लेकर नकारात्मक संदेश जाएगा और भविष्य में औद्योगिक निवेश प्रभावित हो सकता है।
उद्योगपतियों ने चेतावनी दी कि यदि उद्योगों के साथ इस प्रकार का उत्पीड़न नहीं रुका तो सेलाकुई क्षेत्र की करीब 300 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां, जो सरकार को नियमित कर देती हैं और हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराती हैं, राज्य से पलायन करने के लिए मजबूर हो सकती हैं। इससे प्रदेश के औद्योगिक विकास और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उद्योगपतियों की आपत्तियों और मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पंचायत सेलाकुई के अधिशासी अधिकारी श्री पाठक ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि फिलहाल चार माह तक टैक्स वसूली और नोटिस संबंधी कार्रवाई स्थगित रहेगी। उन्होंने कहा कि इस अवधि में यदि FIAU शासन स्तर से कोई निर्णय, आदेश या स्पष्ट दिशा-निर्देश लेकर आता है तो नगर पंचायत उसका पूर्ण पालन करेगी।
FIAU ने इस अंतरिम राहत का स्वागत करते हुए कहा कि यह उद्योगों के हित में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल नोटिस स्थगित कराना नहीं, बल्कि संपत्ति कर के अव्यावहारिक मूल्यांकन, दोहरे कराधान, ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता और औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का स्थायी एवं न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित कराना है।
संगठन ने राज्य सरकार, शासन और जिला प्रशासन से मांग की कि उद्योगों से जुड़े सभी विवादों का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि उत्तराखंड में निवेश का अनुकूल वातावरण बना रहे और रोजगार के अवसर प्रभावित न हों।
प्रतिनिधिमंडल में FIAU के राज्य समन्वयक अनिल मारवाह, राज्य सह-समन्वयक पवन अग्रवाल, अंकुर सिंगल, दीपक रावत, सुरेंद्र नेगी, जितेंद्र सिंह, बृजेश, हरिओम शर्मा, देवेंद्र रावत, अरविंद वर्मा, सुरेश रावत, दीपक वालिया, अमित, विभात और नारायण सिंह सहित अन्य उद्योगपति मौजूद रहे।



