विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर उन सभी पुण्यात्माओं को भावपूर्ण नमन, जिन्होंने वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी के दौरान असहनीय पीड़ा सहते हुए भी अदम्य साहस, धैर्य और मानवता का परिचय दिया।
विभाजन केवल देश की सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि इस त्रासदी ने असंख्य परिवारों को अपनों से अलग कर दिया। लाखों लोगों को अपना घर-बार, जन्मभूमि, संपत्ति और जीवनभर की यादें पीछे छोड़कर विस्थापन की पीड़ा झेलनी पड़ी। इस दौरान अनगिनत लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया और असहनीय परिस्थितियों का सामना किया।
विभाजन की वह पीड़ा आज भी हमारी सामूहिक स्मृतियों में जीवित है। यह दिवस हमें इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय को याद करने के साथ-साथ मानवता, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे के महत्व का संदेश देता है।
विभाजन की विभीषिका से मिले अनुभव हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देते हैं कि देश की एकता और अखंडता को सर्वोपरि रखते हुए समाज में आपसी विश्वास, प्रेम और सौहार्द की भावना को और मजबूत किया जाए।



