लोकसभा चुनाव से पहले आई रिपोर्ट को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। जहां कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए पूरे देश में जातिगत जनगणना कराने की मांग उठाई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा, बीएसपी को खुशी है कि देश की राजनीति उपेक्षित बहुजन समाज के पक्ष में इस कारण नया करवट ले रही है, जिसका नतीजा है कि एससी-एसटी आरक्षण को निष्क्रिय और निष्प्रभावी बनाने और घोर ओबीसी-मण्डल विरोधी जातिवादी एवं साम्प्रदायिक दल भी अपने भविष्य के प्रति चिन्तित नजर आने लगे हैं। वैसे तो यूपी सरकार को अब अपनी नीयत व नीति में जन भावना और जन अपेक्षा के अनुसार सुधार करके जातीय जनगणना/सर्वे तुरंत शुरू करा देना चाहिए, लेकिन इसका सही समाधान तभी होगा जब केन्द्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर जातीय जनगणना कराकर उन्हें उनका वाजिब हक देना सुनिश्चित करेगी। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा, बिहार जाति आधारित जनगणना प्रकाशित, ये है सामाजिक न्याय का गणतीय आधार। जातिगत जनगणना 85-15 के संघर्ष का नहीं बल्कि सहयोग का नया रास्ता खोलेगी और जो लोग प्रभुत्वकामी नहीं हैं बल्कि सबके हक़ के हिमायती हैं, वो इसका समर्थन भी करते हैं और स्वागत भी। जो सच में अधिकार दिलवाना चाहते हैं वो जातिगत जनगणना करवाते हैं। भाजपा सरकार राजनीति छोड़े और देशव्यापी जातिगत जनगणना करवाए। नीतीश कुमार ने कहा कि सरकार अब आर्थिक स्थिति को लेकर भी जानकारी देगी। कल के बाद धीरे-धीरे और जानकारी मिलेगी। हम सभी का विकास चाहते हैं। वहीं, जेडीयू नेता केसी त्यागी का कहना है कि पूरे देश में जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए। इंडिया गठबंध के घोषणापत्र में भी जाति आधारित जनगणना का मुद्दा शामिल होगा। कर्पूरी ठाकुर और वीपी सिंह के बाद नीतीश कुमार आज इन वर्गों के सबसे बड़े नेता के रूप में उभरे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बिहार में जाति आधारित गणना के आंकड़े सामने आने के बाद सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा था। बिहार की जातिगत जनगणना से पता चला है कि वहां ओबीसी एससी और एसटी 84 प्रतिशत हैं। केंद्र सरकार के 90 सचिवों में से सिर्फ 3 ओबीसी हैं, जो भारत का मात्र 5 प्रतिशत बजट संभालते हैं। उन्होंने आगे कहा इसलिए भारत के जातिगत आंकड़े जानना ज़रूरी है। जितनी आबादी उतना हक ये हमारा प्रण है। इसके अलावा भाकपा माले माकपा और भाकपा ने जाति आधारित गणना की रिपोर्ट का स्वागत किया। इन दलों के नेताओं ने कहा कि सरकार को अब वंचितों-उपेक्षितों व गरीबों के समुचित विकास के लिए नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। I.N.D.I.A. गठबंधन इसे लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने जा रही है। यूपी विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने 85 बनाम 15 का मुद्दा दिया था। उनका मकसद आबादी के हिसाब से आरक्षण देने का था। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि अगर कांग्रेस मध्य प्रदेश में सत्ता में आएगी तो वो भी जाति जनगणना कराएगी। यानी 24 के चुनाव में विपक्षी दलों ने इसे मु्द्दा बनाने का संकेत दे दिया है। बिहार से निकला जाति जनगणना का मुद्दा और फिर उसके बाद ओबीसी आरक्षण की बात अगर निकलेगी तो निश्चित तौर पर दूर तलक जाएगी। इससे पहले देश में 1931 में जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी हुए थे। तब से आज तक न ही देश के स्तर पर और न ही राज्य के स्तर पर जातिगत जनगणना के कोई आंकड़े जारी हुए थे। विपक्ष सामाजिक न्याय के नाम पर साल 2024 के चुनावों में जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाकर बीजेपी पर दबाव बनाने और पिछड़े समाज के वोट को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहा है।



