उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में 19 अगस्त से शुरू हुआ विधानसभा का मानसून सत्र महज दो दिन भी नहीं चल पाया और 20 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार सत्र चार दिन चलना था, लेकिन सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और लगातार हंगामे ने इसे इतिहास का सबसे छोटा सत्र बना दिया। दूसरे दिन की कार्यवाही पहले दिन की तरह ही हंगामेदार रही। कांग्रेस विधायकों ने बेरोजगारी, महंगाई, गैरसैंण में सुविधाओं की कमी और सरकार की कथित उदासीनता को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि धामी सरकार गैरसैंण में गंभीरता से सत्र चलाना ही नहीं चाहती और जनता के सामने केवल खोखले दावे करती है। वहीं, आश्चर्यजनक रूप से भाजपा विधायक भी सदन में विरोध जताते नज़र आए। इससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। हालांकि इस राजनीतिक घमासान के बीच सरकार ने तेजी दिखाते हुए 9 विधेयक और 5,315.89 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित करवा लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर सत्र को बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक विधेयक पारित करवाए हैं। उन्होंने विपक्ष पर केवल राजनीति करने और गैरसैंण की गरिमा को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर पलटवार किया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि धामी सरकार गैरसैंण में सत्र चलाना ही नहीं चाहती। जनता से राजधानी को लेकर जो वादे किए गए थे, उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। वरिष्ठ कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि चार दिन का सत्र महज़ कुछ घंटों में निपटा देना यह दर्शाता है कि सरकार गैरसैंण को लेकर गंभीर नहीं है। वहीं सुमित हृदयेश ने आरोप लगाया कि सरकार केवल फोटो खिंचवाने और दिखावा करने के लिए गैरसैंण आती है, जबकि यहां के विकास और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है। सत्र को लेकर कांग्रेस से भाजपा तक सभी बड़े-बड़े इरादों के साथ गैरसैंण पहुंचे थे, लेकिन हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच विधायक खुद भी यही सोचते नजर आए कि सत्र जल्दी खत्म हो और वे हेलीकॉप्टर से सीधे देहरादून लौट जाएं। इस बीच पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि धामी सरकार गैरसैंण को लेकर कभी गंभीर नहीं रही। राजधानी का सपना दिखाकर जनता को छलने का काम किया जा रहा है। सत्र को छोटा करना इस बात का सबूत है। लगातार आरोप-प्रत्यारोप और शोर-शराबे के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित करने का ऐलान कर दिया। इस तरह गैरसैंण का मानसून सत्र महज कुछ घंटों की कार्यवाही के बाद समाप्त हो गया और प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गैरसैंण को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। यहां सत्र कराना हमेशा राजनीतिक बहस का मुद्दा रहा। विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि सरकारें सिर्फ दिखावे के लिए गैरसैंण में सत्र करती हैं, जबकि ढांचागत सुविधाएँ अब भी अधूरी हैं। वहीं, भाजपा सरकार ने 2020 में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया। सत्रों के दौरान सुरक्षा इंतजामों के साथ-साथ स्थानीय जनता की भागीदारी भी बड़ी संख्या में देखने को मिलती है।

गैरसैंण सत्र में हंगामे के बीच धामी सरकार ने पास किए अनुपूरक बजट और 9 विधेयक- उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में शुरू हुआ विधानसभा का मानसून सत्र विपक्ष और सत्ता पक्ष के आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ गया। इसके बावजूद धामी सरकार ने बेहद कम समय की कार्यवाही में 5,315.89 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट और 9 महत्वपूर्ण विधेयक पारित करवा लिए। धामी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5,315.89 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट सदन से पास कराया। इसमें राज्य की विकास योजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यों, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक जरूरतों के लिए अतिरिक्त प्रावधान किए गए हैं। सत्र में हंगामे के बीच सरकार ने निम्नलिखित 9 विधेयक पारित करवाए। 1. उत्तराखंड विनियोग विधेयक 2025 (पूरक बजट से संबंधित)। 2. उत्तराखंड जीएसटी (संशोधन) विधेयक 2025, केंद्र के नए कर प्रावधानों के अनुरूप राज्य जीएसटी कानून में संशोधन। 3. उत्तराखंड पंचायत राज (संशोधन) विधेयक 2025, पंचायतों की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों को सुदृढ़ करने के लिए। 4. उत्तराखंड नगर पालिका (संशोधन) विधेयक 2025, शहरी निकायों में पारदर्शिता और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए। 5. उत्तराखंड सहकारी समितियां (संशोधन) विधेयक 2025, सहकारी समितियों के कामकाज को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए। 6. उत्तराखंड राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2025, उच्च शिक्षा संस्थानों में नई नीतियों को लागू करने हेतु। 7. उत्तराखंड तकनीकी शिक्षा (संशोधन) विधेयक 2025, तकनीकी संस्थानों में आधुनिक कोर्स और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा। 8. उत्तराखंड विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025, बिजली आपूर्ति और उपभोक्ता अधिकारों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से। 9. उत्तराखंड भूमि राजस्व (संशोधन) विधेयक 2025, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और विवाद निस्तारण को सरल बनाने के लिए। सत्र के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि धामी सरकार गैरसैंण में गंभीरता से सत्र चलाना नहीं चाहती और केवल औपचारिकता निभा रही है। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार ने कम समय में भी जनता के हित में बजट और आवश्यक विधेयक पारित कर यह सुनिश्चित किया है कि विकास कार्य प्रभावित न हों।



