लेखक गाँव में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य-सचिव सच्चिदानंद जोशी जी एवं उनकी धर्मपत्नी, साथ ही विधुश्री निशंक जी से आत्मीय भेंट का अवसर प्राप्त हुआ। यह मुलाकात न केवल औपचारिक रही, बल्कि साहित्य, संस्कृति और विचारों के गहरे आदान-प्रदान का माध्यम भी बनी।
इस दौरान उन्हें लेखक गाँव की संकल्पना, उसके साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण तथा भविष्य की योजनाओं से अवगत कराया गया। संवाद का सबसे सुंदर पहलू यह रहा कि इतने प्रतिष्ठित पद पर होने के बावजूद उनके व्यक्तित्व में अद्भुत सरलता, विनम्रता और सहजता स्पष्ट रूप से झलकती है।
अक्सर देखा जाता है कि जो लोग उपलब्धियों के शिखर पर होते हुए भी ज़मीन से जुड़े रहते हैं, वही अपने साथ सकारात्मक, सृजनात्मक और प्रेरणादायी ऊर्जा लेकर चलते हैं। इस भेंट ने इस विचार को और सुदृढ़ किया कि वास्तविक महानता केवल उपलब्धियों में नहीं, बल्कि व्यवहार की विनम्रता में भी निहित होती है।
लेखक गाँव के प्रति उनका स्नेह और भारतीय कला, साहित्य एवं संस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अत्यंत प्रेरणादायक रही, जो इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए नई ऊर्जा प्रदान करती है।



