
देहरादून। भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंध अकादमी (ICAR-NAARM), हैदराबाद और उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के संयुक्त तत्वावधान में RUTAG 2.0 के तहत स्टेकहोल्डर कन्वर्जेन्स मीट का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य तकनीकी समाधानों को किसानों तक पहुंचाना और कृषि क्षेत्र की समस्याओं के तकनीकी समाधान पर मंथन करना रहा।
कार्यक्रम में देशभर के वैज्ञानिकों, किसानों, FPO, NGO और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। विशेषज्ञों ने किसानों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए तकनीक के माध्यम से उनके समाधान की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
मुख्य अतिथि UCOST के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि किसानों की उन्नति और प्रगति के लिए उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के दिशा-निर्देशन में इस प्रकार के कार्यक्रम किसानों तक तकनीकी नवाचार पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शी सोच का परिणाम था कि वर्ष 1960 में गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।
इस अवसर पर भरसार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट, ICAR-NAARM हैदराबाद के निदेशक डॉ. रमन मीनाक्षी सुंदरम, जीबी पंत समिति उत्तराखंड के निदेशक जितेंद्र कवात्रा तथा RUTAG 2.0 परियोजना के मुख्य अन्वेषक डॉ. विजय अविनाश लिंगम ने भी विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में IIT रुड़की, IIT मुंबई, RUTAG विश्वविद्यालय श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर), देहरादून के परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, निदेशक RSETI-PNB, मुख्य कृषि अधिकारी देहरादून, CEO Sheep & Wool Development Board समेत उत्तराखंड के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक, किसान, NGO और FPO प्रतिनिधि शामिल हुए।




