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माँ भारती की बेटी हूँ मैं
हिंदी मेरी शान है
धर्म और जाती से पहले
हिन्दुस्तानी मेरी पहचान है ll
कई रूप मेरी हिंदी के
हर रूप मे सुन्दर लगती है
एक करती है हम सबको
और सबके दिलों मे बसती है ll
भोली भाली मेरी माँ हिंदी
अंग्रेजी मेहमाँ अब इसको छलती है
हक जताती हर क्षेत्र मे अपना
इसको पीछे ही रखती है ll
हो रही सबको अंग्रेजी प्यारी
हिंदी से मुंह सब मोड रहे
अपने ही घर के हर कोने में
अपमान हिंदी अब कैसे सहे ll
भूल न जाना अपनी माँ को
अपने तो अपने होते हैं
जो करते तिरस्कार अपनों का
वो कठिन समय मे रोते हैं ll
आओ मिलकर हम सब भी
हिंदी माँ का श्रृंगार करें
अपनी वाणी मे उसे बसाकर
विश्व मे विस्तार करें ll
हिंदी की गरिमा के लिये हम
अंग्रेजी का बहिष्कार करें
सर्वप्रथम हिंदी को मान दें
फिर अंग्रेजी को स्वीकार करें ll
अनीता चमोली “अनू”
देहरादून ( उत्तराखंड )




