(मोदी सरकार ने इन परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इस पर कुल 4081.28 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद केदारनाथ धाम सालभर सोनप्रयाग से जुड़ा रहेगा। केदारनाथ में बनने वाला रोपवे सबसे एडवांस्ड ट्राई केबल डिटेचेबल गोंडोला टेक्नीक वाला होगा। इससे हर घंटे 1800 और हर दिन 18 हजार तीर्थ यात्रियों को पहुंचाया जाएगा। केदारनाथ जाने में एक तरफ से कम से कम 9 घंटे का समय लगता है। रोपवे बन जाने के बाद यह यात्रा 36 मिनट में होगी। केदारनाथ मंदिर तक की यात्रा गौरीकुंड से 16 किमी की कठिन चढ़ाई है। अभी इसे पैदल, पालकी, टट्टू और हेलिकॉप्टर से पूरा किया जाता है। हेमकुंड साहिब रोपवे प्रोजेक्ट के लिए 2730 करोड़ रुपये की धनराशि भी मंजूर की है। यह प्रोजेक्ट 12.4 किलोमीटर लंबा होगा।)
उत्तराखंड में स्थित बाबा केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब के तीर्थ यात्रियों के लिए मोदी सरकार ने 5 मार्च 2025 को बड़ी खुशखबरी दी है। केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब में “रोप-वे” बनाए जाएंगे। जिसके बाद श्रद्धालुओं को कठिन और लंबी चढ़ाई उसे बड़ी राहत मिलेगी। कैबिनेट की बैठक में मोदी सरकार ने इस परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर कुल 4081.28 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था और अब केंद्रीय कैबिनेट से इसकी स्वीकृति मिलने के बाद यह प्रोजेक्ट जल्द ही धरातल पर उतरेंगे। इस प्रोजेक्ट से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि यह यात्रा सुरक्षित और सुविधाजनक भी होगी। प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद केदारनाथ धाम सालभर सोनप्रयाग से जुड़ा रहेगा। वहीं तीर्थयात्रियों को 16 किमी लंबे दुर्गम रास्ते से भी छुटकारा मिल जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट ने हेमकुंड साहिब रोपवे प्रोजेक्ट के लिए 2730 करोड़ रुपये की धनराशि भी मंजूर की है। यह प्रोजेक्ट 12.4 किलोमीटर लंबा होगा। कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, ‘अभी जो यात्रा 8-9 घंटे में पूरी होती है, वह घटकर 36 मिनट की हो जाएगी। इसमें 36 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड में सोनप्रयाग से केदारनाथ तक (12.9 किमी) और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी तक (12.4 किमी) का रोपवे बनेगा। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट इसे बनाएगा। भगवान शिव का मंदिर केदारनाथ में है। यह समुद्र तल से 3,584 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां मंदाकिनी नदी है। केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। केदारनाथ में बनने वाला रोपवे सबसे एडवांस्ड ट्राई केबल डिटेचेबल गोंडोला टेक्नीक वाला होगा। इससे हर घंटे 1800 और हर दिन 18 हजार तीर्थ यात्रियों को पहुंचाया जाएगा। केदारनाथ जाने में एक तरफ से कम से कम 9 घंटे का समय लगता है। रोपवे बन जाने के बाद यह यात्रा 36 मिनट में होगी। केदारनाथ मंदिर तक की यात्रा गौरीकुंड से 16 किमी की कठिन चढ़ाई है। अभी इसे पैदल, पालकी, टट्टू और हेलिकॉप्टर से पूरा किया जाता है।गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किमी रोपवे बनेगा। इसमें 2,730.13 करोड़ रुपए खर्च होंगे। रोपवे से हर घंटे 1100 और हर दिन 11 हजार यात्रियों को ले जाया जाएगा। हेमकुंड साहिब उत्तराखंड के चमोली जिले में है। इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 15 हजार फीट है। यहां स्थापित गुरुद्वारा मई से सितंबर के बीच साल में लगभग 5 महीने के लिए खुलता है। हर साल लगभग 2 लाख तीर्थयात्री यहां आते हैं। केंद्र सरकार के इस कदम से चारधाम यात्रा को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय व्यवसायों को लाभ मिलेगा और क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को बल मिलेगा। इससे पूरे छह महीने तीर्थयात्रियों की आवाजाही बनी रहेगी, जिससे शुरुआती दो महीनों में संसाधनों पर अत्यधिक दबाव कम होगा। इतना ही नहीं यात्रा सीजन में रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी होगी। मालूम हो कि हर साल चार धाम यात्रा के समय केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। केदारनाथ की चढ़ाई बेहद दुर्गम है। ऐसे में यहां तक जाना काफी मुश्किल भरा होता है। केदारनाथ में रोप-वे बनने से यहां तक आना-जाना आसान हो जाएगा। केंद्र सरकार के फैसले पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पर्वतमाला परियोजना के अंतर्गत सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए मैं प्रदेशवासियों की ओर से आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इन परियोजनाओं से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे चारधाम यात्रा सुगम होगी। यात्रा में लगने वाला समय भी कम होगा। इससे तीर्थयात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
इस साल 30 अप्रैल से शुरू होगी चार धाम यात्रा, धामी सरकार ने शुरू की तैयारियां–
अगले महीने से शुरू होने वाली उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के लिए धामी सरकार तैयारियों में जुटी हुई है। चार धाम जाने वाले देश भर के श्रद्धालु ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। इस साल 2025 में चार धाम यात्रा 30 अप्रैल से शुरू होगी। इसी दिन गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके बाद, 2 मई को केदारनाथ धाम और 4 मई को बद्रीनाथ धाम के दरवाजे भक्तों के दर्शन के लिए खुलेंगे। हर साल की तरह यह यात्रा करीब 6 महीने तक चलेगी और फिर ठंड के मौसम में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। चार धाम यात्रा में सबसे पहले यमुनोत्री धाम के दर्शन किए जाते हैं, फिर गंगोत्री, केदारनाथ और आखिर में बद्रीनाथ के दर्शन होते हैं। हर धाम का अपना अलग महत्व और पौराणिक कथा है। चार धाम यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री मंदिर से होती है। यह मंदिर मां यमुना को समर्पित है। मान्यता है कि अगर यात्रा यमुनोत्री से शुरू की जाए, तो यात्रा बिना किसी रुकावट के पूरी हो जाती है। यहां एक गर्म पानी का कुंड भी है, जिसमें श्रद्धालु स्नान करके अपनी यात्रा शुरू करते हैं। यमुनोत्री के बाद अगला पड़ाव गंगोत्री धाम है। यह मां गंगा का मंदिर है। कहा जाता है कि यहां आकर स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। गंगोत्री धाम से ही गंगा नदी का उद्गम हुआ है, जिसे पवित्रतम नदी माना जाता है।तीसरा पड़ाव केदारनाथ धाम है, जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इस धाम तक पहुंचने के लिए 16-17 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है। कहा जाता है कि केदारनाथ में दर्शन करने से जीवन के सभी दुख-दर्द खत्म हो जाते हैं। अंत में बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए जाते हैं, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि बद्रीनाथ में भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। बद्रीनाथ धाम को मोक्ष प्राप्ति का द्वार भी कहा जाता है।



