थौल का हमारी लोकसंस्कृति से सदियों पुराना और गहरा संबंध रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में वैशाख माह के आगमन के साथ ही विभिन्न स्थानों पर थौल मेलों का आयोजन प्रारंभ हो जाता है। यह आयोजन मुख्यतः लोक देव-देवताओं की पूजा-अर्चना, उनके आह्वान, डोली यात्राओं एवं पारंपरिक अनुष्ठानों से जुड़ा होता है। इन अवसरों पर क्षेत्रवासी एकत्रित होकर अपने इष्ट देवताओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं।
इसी क्रम में आज माँ कर्णा देवी बैशाख थौल महोत्सव (द्विग्वाली थौल) में प्रतिभाग किया गया। इस अवसर पर लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य, लोकगीत एवं आकर्षक सांस्कृतिक झांकियों ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया और उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के जीवंत प्रतीक आदरणीय Narendra Singh Negi भी विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिनकी उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।



