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Home » पूर्व राज्यपाल के बेटे होंगे देश के नए मुख्य न्यायाधीश
उत्तराखण्ड

पूर्व राज्यपाल के बेटे होंगे देश के नए मुख्य न्यायाधीश

Pahad ki KhabarBy Pahad ki KhabarApril 22, 2025Updated:July 5, 2025No Comments
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(बीआर गवई देश के नए मुख्य न्यायाधीश होंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने आधिकारिक तौर पर जस्टिस गवई को अपना उत्तराधिकारी बनाने की सिफारिश की है। उनके नाम को मंजूरी के लिए केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेज दिया है। वह 14 मई को शपथ लेंगे। बीआर गवई अनुसूचित जाति से आने वाले दूसरे चीफ जस्टिस होंगे, उनके पहले सीजेआई केजी बालाकृष्णन भी अनुसूचित जाति के थे।उनके पिता दिवंगत आरएस गवई एक राजनेता थे। उन्होंने महाराष्ट्र में राजनीति करने के लिए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (गवई) नाम की पार्टी बनाई थी। वे आरएस गवई के बेटे हैं जो बिहार और केरल के राज्यपाल रह चुके हैं।)

भूषण रामकृष्ण (बीआर) गवई देश के नए मुख्य न्यायाधीश होंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने आधिकारिक तौर पर जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई को अपना उत्तराधिकारी बनाने की सिफारिश की है। उनके नाम को मंजूरी के लिए केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेज दिया है। इस सिफारिश से जस्टिस गवई के भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश बनने का रास्ता साफ हो गया है। वह 14 मई को शपथ लेंगे। वर्तमान सीजेआई संजीव खन्ना ने बुधवार को केंद्रीय कानून मंत्रालय से सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश बीआर गवई को अगला सीजेआई नियुक्त करने की सिफारिश की थी। सीजेआई खन्ना 13 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। बीआर गवई अनुसूचित जाति से आने वाले दूसरे चीफ जस्टिस होंगे, उनके पहले सीजेआई केजी बालाकृष्णन भी अनुसूचित जाति के थे।उनके पिता दिवंगत आरएस गवई एक राजनेता थे। उन्होंने महाराष्ट्र में राजनीति करने के लिए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (गवई) नाम की पार्टी बनाई थी। वे आरएस गवई के बेटे हैं जो बिहार और केरल के राज्यपाल रह चुके हैं। परंपरा के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चीफ जस्टिस ही अपने उत्तराधिकारी का नाम सरकार को भेजते हैं। इस बार भी यही प्रक्रिया अपनाई गई है। कानून मंत्रायल ने औपचारिक तौर पर जस्टिस खन्ना से उनके उत्तराधिकारी का नाम पूछा था, जिसके जवाब में उन्होंने जस्टिस गवई का नाम आगे बढ़ाया।

बीआर गवई का कार्यकाल छह महीने से अधिक का होगा–

52वें सीजेआई बनने की दौड़ में शामिल न्यायमूर्ति गवई का कार्यकाल 6 महीने से अधिक का होगा और वे 23 नवंबर, 2025 को पद से मुक्त होंगे। सीजेआई खन्ना ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति गवई के नाम की सिफारिश की है, जो सीजेआई द्वारा अपने उत्तराधिकारी के रूप में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को नामित करने की स्थापित परंपरा के अनुसार है। मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के अनुसार, केंद्र निवर्तमान सीजेआई से सेवानिवृत्ति से ठीक एक महीने पहले उत्तराधिकारी का नाम बताने के लिए कहता है। बेंच में पदोन्नत होने से पहले, उन्होंने संवैधानिक कानून और प्रशासनिक कानून में प्रैक्टिस की और नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के लिए स्थायी वकील के रूप में कार्य किया। उन्हें अगस्त 1992 में बॉम्बे उच्च न्यायालय, नागपुर पीठ में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त किया गया जहां उन्होंने जुलाई 1993 तक सेवा की। उन्हें 17 जनवरी, 2000 को नागपुर पीठ के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त किया गया था।

जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ–

जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। जस्टिस गवई ने अपने वकालत करियर की शुरुआत साल 2003 में बॉम्बे उच्च न्यायालय में बतौर एडिश्नल जज की थी। इसके बाद साल 2005 में वे स्थायी जज नियुक्त हुए। जस्टिस गवई ने 15 वर्षों तक मुंबई, नागपुर, औरंगाबाद और पणजी की पीठ में अपनी सेवाएं दीं। जस्टिस गवई के नाम पर अगर मुहर लगती है तो वे देश के दूसरे अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले मुख्य न्यायाधीश होंगे। उनसे पहले जस्टिस केजी बालाकृष्णन साल 2010 में यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। जस्टिस बीआर गवई साल 2016 में नोटबंदी को लेकर दिए गए फैसले का हिस्सा रहे। जिसमें कहा गया था कि सरकार को करेंसी को अवैध घोषित करने का अधिकार है। इसके अलावा जस्टिस गवई बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ दिए आदेश का भी हिस्सा रहे और इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर फैसला देने वाली पीठ का भी हिस्सा रहे।

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