
यूकॉस्ट द्वारा ने “स्थलीय एवं अंतरिक्ष आधारित प्रेक्षणों का उपयोग करते हुए हिमालयी हिमनदों तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न क्रायोस्फेरिक खतरों की निगरानी (“Monitoring Himalayan Glaciers and Climate Change-Induced Cryospheric Hazards Using Ground- and Space-Based Observations)” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन
उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) देहरादून द्वारा “स्थलीय एवं अंतरिक्ष आधारित प्रेक्षणों का उपयोग करते हुए हिमालयी हिमनदों तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न क्रायोस्फेरिक खतरों की निगरानी” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन दिनाँक 22 जुलाई 2026 को परिषद में किया गया । कार्यक्रम का आयोजन यूकॉस्ट के ‘माँ धरा नमन एवं जल शिक्षा कार्यक्रम’ के अंतर्गत किया गया । इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने ग्लेशियरों के अध्ययन एवं मॉनिटरिंग संबंधी वैज्ञानिक कार्यों में विज्ञान एवं तकनीकी के अधिकतम प्रयोग को बहुत आवश्यक बताया ।
कार्यक्रम संयोजक यूकास्ट के वैज्ञानिक डॉ भवतोष शर्मा ने यूकॉस्ट के द्वारा संचालित किया जा रहे ‘मां धरा नमन कार्यक्रम एवं जल शिक्षा कार्यक्रम’ के विषय में बताया। उन्होंने कहा कि जल शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत समय-समय पर विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित किये जाते हैं जिसमें विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ साथ विभिन्न संस्थाओं के वैज्ञानिकों द्वारा भी प्रतिभाग किया जाता है। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मनीष मेहता ने “स्थलीय एवं अंतरिक्ष आधारित प्रेक्षणों का उपयोग करते हुए हिमालयी हिमनदों तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न क्रायोस्फेरिक खतरों की निगरानी (“Monitoring Himalayan Glaciers and Climate Change-Induced Cryospheric Hazards Using Ground- and Space-Based Observations)” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया।
अपने व्याख्यान में उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों की स्थिति, ग्लेशियरों को लेकर हो रहे विभिन्न अध्ययन, बर्फ की मात्रा और हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने से बनने वाली विभिन्न प्रकार की झीलें, और ग्लेशियल लेक आउट वर्स्ट फ्लड (GLOF) के विषय में विस्तार से बताया तथा जलवायु परिवर्तन का ग्लेशियरों पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में जानकारी दी ।
कार्यक्रम में ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से उत्तराखंड के विभिन्न पर्वतीय सीमांत जनपदों से विद्यार्थियों ने अपने-अपने विद्यालयों के माध्यम से समूह में प्रतिभाग किया । कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थी, शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों ने अपने-अपने प्रश्नों का समाधान भी प्राप्त किया ।
कार्यक्रम में डॉ डीपी उनियाल, संयुक्त निदेशक यूकास्ट ने तकनीकी के प्रयोग से हिमालय क्षेत्र के वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा में विद्यार्थियों से जुड़ने का आह्वान किया एवं संबंधित विभाग द्वारा विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण भी दिए जाने का आवाहन किया।
कार्यक्रम में चमोली से आगास संस्था के संस्थापक पर्यावरणविद् श्री जेपी मैथानी मैं हिमालय क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों को बताया तथा उन्होंने विभिन्न कक्षाओं में हिमालयी ग्लेशियरों एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित पाठ्यक्रम को पढ़ाये जाने का सुझाव भी दिया। डा भवतोष शर्मा वैज्ञानिक यूकॉस्ट ने हिमालयी भूभाग में आपदा प्रबंधन में जागरूकता के साथ सामाजिक सहभागिता बढ़ाने का सुझाव दिया एवं तकनीकी का सकारात्मक प्रयोग करने पर बल दिया। कार्यक्रम में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से 300 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन
डा भवतोष शर्मा वैज्ञानिक यूकॉस्ट ने किया एवं
डॉ ओमप्रकाश नौटियाल वैज्ञानिक यूकॉस्ट ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


