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आज बाजारों मे भीड देखी
हर तरफ राखी ही राखी
जो भाई की कलाई मे सजेगी
हर बहन की दुआ बनकर
प्यार और विश्वास के रूप मे
मांगा था हर बहन ने हिफाजत का वचन
और हर भाई ने दिया भी था विश्वास से मुस्कुराकर
तो फिर अखबार मे ये कौन सी बहन
है जिसकी इज्जत को तार तार किया है
किसी कलाई मे राखी बंधे हाथों ने
कोई दुधमुंही है तो कोई नाबालिक
किसी के बालिक होकर सपनो के आसमान मे उडने की तैयारी थी
येे कैसा त्यौहार है ये कैसी परम्परा है जिसका अब इंसानियत से कोई सरोकार नही रह गया है
भाई अब मुझे मेरी रक्षा का वचन नही चाहिए
बस वचन दो की ये हाथ जिस पर मेरी राखी सजेगी
सदा ही हर बहन रक्षा करेंगे
जैसे हमारे फौजी भाई करते है
सूनी हाथों मे बंदूक सजाकर हमारी बाहरी लोगों से
उनके लिये बहन अपनी परायी नही बस इज्जत है वो हमारे देश की
सरहद मे उनकी कलाई सूनी है राखी बिन लेकिन वचनबद्ध है वो हमारी रक्षा के लिये
सलाम है देश के उन फौजी भाईयों को
मेरी जैसी हर बहन का
अब की राखी मे हम बहनों को कोई उपहार नही बस वचन चाहिए
रक्षा करोगे तुम हर बहन की तभी तुम राखी के तुम हकदार होंगे
तुम राखी के हकदार होंगे
अनीता चमोली “अनू, ”
देहरादून ( उत्तराखंड )



