करवाचौथ का त्योहार मनाते हो,
फिर क्यों सूना जीवन बिताते हो?
एक दिवस पति-पूजा करते हो,
साल भर दूजे को लुभाते हो!
इस दिन पति वफ़ादार लगता,
सीधा-सादा किरदार लगता,
पत्नी से पूजा करवाते हैं,
फिर दूजी पर नज़र गड़ाते हैं!
गरिमा इसकी खोती जाती,
पत्नी प्रेम की आस लगाती,
कोई छिपकर रिश्ते निभाता,
कोई विश्वास का मान गँवाता!
ये चकाचौंध प्रेम की देन नहीं,
बाज़ार की चमक है, प्रेम नहीं,
त्योहार बना व्यापार का साधन,
मुनाफ़े में डूबा इसका आँगन!
न धन-दौलत की होड़ लगाओ,
न सौंदर्य की दौड़ में जाओ,
रस्मों से बढ़कर प्रेम निभाओ,
दिल से दिल का दीप जलाओ!
न व्रत से प्रेम, न गहनों से मान,
विश्वास से ही रिश्ते की शान।
निष्ठा दोनों का आभूषण हो,
प्रेम ही जीवन का मधुबन हो।
एक दिवस क्यों प्रेम जताएँ,
हर दिन एक-दूजे का मान बढ़ाएँ।
दिखावे के दीप बुझाओ,
दिल में प्रेम की ज्योति जलाओ!

अनीता चमोली” अनू”
देहरादून (उत्तराखंड )




