खामोशियाँ भी बोलती है समझ आना चाहिए।
दर्द कितने हो जिगर मे मुस्काना चाहिए।
कंकड भरी राहों में न बिन चप्पल के जाना चाहिए।
पीछे से धोखा अपने ही करते
पीठ उनसे न थपथपवाना चाहिए।
रंगीन ख्वाबों का दौर है न धोखा खाना चाहिए।
झोपडी जैसी भी हो अपनी न छोडकर जाना चाहिए।
बुझती नही प्यास सागर से बादलों को रिझाना चाहिए।
इल्जाम दूजे पर लगाने से पहले
खुद मे भी झांक लेना चाहिए।
सोच समझकर लोगो से पहचान बढानी चाहिए।
दोस्ती गर सच्ची हो तो दिल से निभानी चाहिए।
अनीता चमोली “अनू”
देहरादून (उत्तराखंड)



