सोलन में पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक बागवानी तकनीकों का गुर सीखेंगे किसान, प्रदेश में 5 हजार हेक्टेयर में सेब के बागान विकसित करने का लक्ष्य
देहरादून, 3 नवंबर। उत्तराखंड में सेब उत्पादन को बढ़ावा देने, पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी आधारित रोजगार के अवसर विकसित करने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रोत्साहित कर रही है। इसी कड़ी में कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने मंगलवार को हाथीबड़कला स्थित अपने कैंप कार्यालय से जनपद देहरादून के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के 28 किसानों के दल को पांच दिवसीय प्रशिक्षण के लिए हिमाचल प्रदेश रवाना किया। कृषि मंत्री ने किसानों के दल को डॉ. वाई.एस. परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, नौणी, सोलन के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
हिमाचल प्रदेश के सोलन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसान सेब की अति सघन बागवानी से जुड़ी आधुनिक एवं उन्नत तकनीकों की जानकारी प्राप्त करेंगे। इसमें पौधों की कटाई-छंटाई, फलदार पौधों का रोपण, उर्वरक प्रबंधन, जैविक खाद का उपयोग, बडिंग एवं ग्राफ्टिंग, फलों की पैकेजिंग तथा विपणन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि किसानों को आधुनिक बागवानी तकनीकों से जोड़ना प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद किसान अपने बागानों में इन तकनीकों का उपयोग कर सकेंगे। साथ ही वे अपने क्षेत्रों के अन्य किसानों को भी आधुनिक बागवानी के प्रति जागरूक करेंगे। इससे प्रदेश में सेब उत्पादन और उत्पादकता में गुणात्मक वृद्धि होने के साथ ही किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए क्लस्टर आधारित खेती तथा उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में प्रदेश में 808.79 करोड़ रुपये की लागत से सेब की अति सघन बागवानी योजना संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत 5,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सेब के बागान विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के तहत किसानों को 60 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
कृषि मंत्री ने बताया कि सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही फसल की तुड़ाई के बाद उसके सुरक्षित रखरखाव और बेहतर विपणन की व्यवस्था विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए 144.55 करोड़ रुपये की लागत से सेब तुड़ाई उपरांत प्रबंधन योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत नियंत्रित वातावरण (सी.ए.) स्टोरेज तथा सॉर्टिंग-ग्रेडिंग इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इन इकाइयों की स्थापना के लिए किसानों एवं संबंधित इकाइयों को 50 से 70 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने आगे बताया कि प्रदेश में गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 80 करोड़ रुपये की लागत से सेब की अत्याधुनिक नर्सरी योजना भी संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत 400 एकड़ क्षेत्रफल में नर्सरी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे किसानों को उन्नत किस्म के पौधे उपलब्ध कराने और सेब उत्पादन के विस्तार में सहायता मिलेगी।
गणेश जोशी ने कहा कि सेब की अति सघन बागवानी पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप किसानों के लिए आय का एक बेहतर माध्यम बन सकती है। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केवल योजनाएं संचालित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें आधुनिक कृषि एवं बागवानी तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से भविष्य में जिला योजना एवं राज्य सेक्टर की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से समय-समय पर किसानों का चयन कर उन्हें प्रदेश के भीतर और अन्य राज्यों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। सेब उत्पादन के साथ-साथ कीवी फल उत्पादन और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों में भी किसानों को प्रशिक्षित करने की योजना है, ताकि वे खेती के विविध विकल्प अपनाकर अपनी आय के स्रोत बढ़ा सकें।
कृषि मंत्री ने विश्वास जताया कि आधुनिक तकनीकों, बेहतर पौध सामग्री, फसल प्रबंधन, भंडारण और विपणन की सुविधाओं के समन्वय से उत्तराखंड में बागवानी क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
इस अवसर पर सरकार में दायित्वधारी ज्योति कोटिया, संध्या थापा, मुख्य उद्यान अधिकारी डॉ. डी.के. तिवारी सहित अन्य कृषक उपस्थित रहे।




