तुम स्त्री हो l
घर का चौका तुम्हारा है l
घर का आंगन तुम्हारा है l
घर का मेहमाँ तुम्हारा है l
घर का पशु तुम्हारा है l
घर का सम्मान तुम्हारा है l
घर का हर कोना तुम्हारा है l
घर का संस्कार तुम्हारा है l
लेकिन घर पर अधिकार हमारा है l
“अनीता चमोली”
देहरादून ( उत्तराखंड )



