माँ आज फिर आजादी का दिन आ गया
क्या मै भी अब आजाद हूँ
दरिंदो की घूरती निगाहों से
खुली हवा मे घूम सकूं मिलू
जब धूप या छांव से
क्या मुझे मेरी खुशी चुनने की
आजादी मिल पायेगी
क्या मेरी बेडियों से लिपटी पायल
अब खुल पायेगी
माँ देखो आज फिर आजादी का दिन आ गया
क्या अब मै सुनसान राहों मे चल पाऊँगी
क्या अब मै नौकरी मे शिक्षा का बल पाऊगी
क्या मुझे अब बचपन मे नही नोंचा जायेगा
मुझे बचाने क्या कोई नया कानून आयेगा
क्या अब मै जिंदगी के दोराहों मे खुद की राह चुन पाऊँगी
क्या मै भी अस्तित्व मे जीने का सपना बुन पाऊंगी
माँ देखो आज फिर आजादी का दिन गया
जिस आजादी को हम मनाते है वो
किसके लिये आती है
इतने वर्ष बाद भी क्यू किसी को मेरी चिंता नही सताती है
मेरी बहन आजादी सिर्फ मेरे भाइयों को हक दिलाती है
मेरी अजीज होकर भी मुझ से क्यू सौतेला रिश्ता निभाती है
माँ आज फिर आजादी का दिन आ गया
क्या मै भी अब आजाद हूँ
अनीता चमोली “अनू”
देहरादून (उत्तराखंड)



