मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा करेंगे उद्घाटन, 13 तकनीकी प्रभागों में प्रस्तुत होंगे 260 से अधिक शोध-पत्र
देहरादून। उत्तराखंड में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 21वां उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन 25 और 26 अक्टूबर 2026 को विज्ञान धाम स्थित उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट), देहरादून में आयोजित किया जाएगा। यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा करेंगे। सम्मेलन में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, नवाचारकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और उद्यमियों सहित 1000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास, तकनीकी प्रगति और नवाचारों पर चर्चा करना तथा क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान में वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका को मजबूत करना है। यह आयोजन वैज्ञानिक समुदाय, सरकारी संस्थानों, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और मीडिया के बीच संवाद एवं सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।
13 तकनीकी प्रभागों में प्रस्तुत होंगे 260 से अधिक शोध-पत्र
सम्मेलन के दौरान 13 तकनीकी प्रभागों में 260 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इनमें कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान एवं वानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, जैव रसायन एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान, रासायनिक विज्ञान, भू-विज्ञान, इंजीनियरिंग विज्ञान, पदार्थ विज्ञान एवं नैनो प्रौद्योगिकी, गृह विज्ञान, स्वास्थ्य एवं पोषण, गणित एवं सांख्यिकी, कंप्यूटर विज्ञान एवं उभरती प्रौद्योगिकियां, चिकित्सा एवं औषध विज्ञान, भौतिक विज्ञान, ग्रामीण विज्ञान एवं विज्ञान और समाज तथा प्राणी विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन जैसे विषय शामिल हैं। इसके साथ ही वर्ष के सर्वश्रेष्ठ नवाचारकर्ता (इनोवेटर ऑफ द ईयर) श्रेणी भी सम्मेलन का हिस्सा होगी।
इन तकनीकी सत्रों में शोधकर्ता अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत करेंगे और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। सम्मेलन में युवा शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को अपने शोध कार्यों और नवाचारों को सामने रखने का अवसर मिलेगा। साथ ही, अंतर्विषयक अनुसंधान और वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक समाधानों में बदलने पर जोर दिया जाएगा।
विकसित भारत और सशक्त उत्तराखंड-2047 पर होगा मंथन
सम्मेलन के दौरान विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं के बीच मंथन सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति के माध्यम से विकसित भारत और सशक्त उत्तराखंड-2047 की परिकल्पना, हिमालयी क्षेत्र में आपदा-सहिष्णुता को मजबूत करने तथा साइबर-फिजिकल सिस्टम, STEM शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वर्तमान स्थिति, उभरते रुझानों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। विज्ञान एवं आध्यात्मिकता के बीच संबंध, वैज्ञानिक जिज्ञासा, चेतना और मानवीय कल्याण जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा होंगे।
सम्मेलन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति-2026 के तहत विज्ञान संचार और मीडिया की भूमिका, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी, उत्तराखंड में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) की स्थिति और संभावनाओं तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों एवं नैतिकता पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही हिमालय के सतत विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका पर उत्तराखंड के विशेष संदर्भ में विचार किया जाएगा।
इन सत्रों का उद्देश्य वैज्ञानिक संस्थानों और सरकारी तंत्र के बीच समन्वय बढ़ाना, नीतिगत संवाद को प्रोत्साहित करना तथा आपदा प्रबंधन, तकनीकी विकास, क्षेत्रीय चुनौतियों और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए व्यावहारिक उपाय तलाशना है।
विज्ञान संचार और मीडिया की भूमिका पर विशेष सत्र
सम्मेलन के पहले दिन 25 अक्टूबर को विज्ञान संचार तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और प्रख्यात पत्रकारों की सहभागिता रहेगी। सत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, जनसंचार और नीतिगत निर्माण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर चर्चा होगी।
इस दौरान वैज्ञानिक उपलब्धियों और नवीनतम शोध को आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने, समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा अनुसंधान एवं नवाचार को व्यापक पहचान दिलाने में मीडिया की भूमिका पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा वैज्ञानिक संस्थानों और आम लोगों के बीच संवाद मजबूत करने तथा उत्तराखंड में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ी प्राथमिकताओं को जनसामान्य तक पहुंचाने की रणनीतियों पर भी मंथन होगा।
विज्ञान प्रीमियर लीग और लैब ऑन व्हील्स भी होंगे आकर्षण
सम्मेलन के अंतर्गत द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग का आयोजन भी किया जाएगा। इसके माध्यम से प्रतिभागियों में विज्ञान के प्रति रुचि, सक्रिय सहभागिता और वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रति उत्साह बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
इसके साथ ही लैब ऑन व्हील्स (Lab on Wheels) अभिमुखीकरण कार्यक्रम भी आयोजित होगा। इसका उद्देश्य व्यावहारिक एवं अनुभवात्मक विज्ञान शिक्षा के महत्व को रेखांकित करना और विद्यार्थियों तथा विभिन्न समुदायों तक विज्ञान संबंधी सीखने के अवसरों की पहुंच बढ़ाने के प्रति जागरूकता विकसित करना है।
वैज्ञानिक संस्थानों और स्टार्टअप्स की प्रदर्शनी लगेगी
सम्मेलन के दौरान विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स की ओर से प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान पहलों, तकनीकी नवाचारों, उभरते समाधानों और उद्यमशीलता से जुड़े प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा।
यह प्रदर्शनी संस्थानों और नवाचारकर्ताओं को अपने कार्यों एवं उपलब्धियों को प्रस्तुत करने, नए विचारों का आदान-प्रदान करने तथा भविष्य में सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर प्रदान करेगी। इसके माध्यम से अनुसंधान एवं नवाचार को शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक आवश्यकताओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।
हिमालयी चुनौतियों के समाधान में विज्ञान की भूमिका पर जोर
21वां उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन राज्य के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होने की उम्मीद है। सम्मेलन में तकनीकी सत्रों, विषयगत चर्चाओं, संवादात्मक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के माध्यम से युवा शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों, आपदा-सहिष्णुता, सतत विकास और तकनीकी प्रगति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका को प्रमुखता दी जाएगी। 1000 से अधिक प्रतिभागियों की संभावित सहभागिता और 260 से अधिक शोध-पत्रों की प्रस्तुति के साथ यह सम्मेलन वैज्ञानिक उपलब्धियों को पहचान दिलाने, नए विचारों को प्रोत्साहित करने तथा विकसित भारत और प्रगतिशील उत्तराखंड के लक्ष्य को साकार करने में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के महत्व को रेखांकित करेगा।




